माधौपुर निनैया में कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का हुआ शुभारंभ

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कपिल तिवारी


रायबरेली सलोन।माधौपुर निनैया में निकली कलश यात्रा से श्रीमद्भागवत कथा शुरू हुई। इस दौरान श्रद्धालुओं के लगाए राधे-राधे के उदघोषों से गाँव भक्ति के रस में डूब गए। पहले दिन कथा व्यास वृंदावन से पधारे अनिकेत महाराज ने भगवान के विराट रूप का वर्णन कर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। देर शाम तक श्रद्धालु भजनों पर झूमते रहे और आरती के साथ पहले दिन कथा का विश्राम हुआ।

भागवत पंडाल से शुरू हुई कलश यात्रा में सबसे आगे श्रीमद भागवत जी को सिर पर उठाए मुख्य यजमान चल रहे थे। काफी संख्या में पीले वस्त्र धारण की हुईं महिलाएं व युवतियां सिर पर कलश लेकर व मंगलगीत गाते हुए यात्रा में शामिल हुईं। इसके अलावा काफी संख्या में छोटे बच्चे व युवा भी यात्रा में शामिल होकर स्पीकर पर चले भजनों पर थिरकते नजर आए। कलश यात्रा में श्रद्धालुओं ने पूरी आस्था से श्रीराधे-राधे के जयकारे लगाए। कई जगह यात्रा पर फूलों की वर्षा की गई। सई नदी से लेकर पूरे गांव की परिक्रमा कर यात्रा कथा स्थल पर पहुंची। जहां विधिविधान पूर्वक वृंदावन से आए अनिकेत महाराज द्वारा मंत्रोच्चारण के बीच पुरोहितों द्वारा श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ कराया गया।

अनिकेत महाराज के व्यास पीठ पर आसन होने के पश्चात् उनका माल्यापर्ण कर, उपरणा (शाल) ओढ़ाकर स्वागत किया गया। महाराज ने पहले दिन उपस्थित श्रद्धालुओं को श्रीमदभागवत कथा का महत्व समझाते हुए कहा कि भागवत कथा में जीवन का सार तत्व मौजूद है। आवश्यकता है निर्मल मन और स्थिर चित्त के साथ कथा श्रवण करने की। भागवत श्रवण से मनुष्य को परमानंद की प्राप्ति होती है। भागवत श्रवण से प्रेतयोनी से मुक्ति मिलती है। चित्त की स्थिरता के साथ ही श्रीमद्भागवत कथा सुननी चाहिए। भागवत श्रवण मनुष्य के सम्पूर्ण क्लेश को दूर कर भक्ति की ओर अग्रसर करती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य जब अच्छे कर्मों के लिए आगे बढ़ता है तो संपूर्ण सृष्टि की शक्ति समाहित होकर मनुष्य के पीछे लग जाती है और हमारे सारे कार्य सफल होते हैं। ठीक उसी तरह बुरे कर्मों की राह के दौरान संपूर्ण बुरी शक्तियां हमारे साथ हो जाती हैं। इस दौरान मनुष्य को निर्णय करना होता कि उसे किस राह पर चलना है। छल और छलावा ज्यादा दिन नहीं चलता। छल रूपी खटाई से दूध हमेशा फटेगा। छलछिद्र जब जीवन में आ जाए तो भगवान भी उसे ग्रहण नहीं करते है। निर्मल मन प्रभु स्वीकार्य है। छलछिद्र रहित और निर्मल मन भक्ति के लिए जरूरी है। उन्होंने पहले दिन भगवान के विराट रूप का वर्णन किया, जिसे सुन उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। इसके बाद भजन, गीत व संगीत पर श्रद्धालु देर शाम तक झूमते रहे। इस मौके पर , अमरनाथ तिवारी, पंडित शिवकांत मिश्रा, पंडित शिवद्दत शुक्ल,शास्त्री रामरूप बेलौरा, पंडित रमडेस शुक्ल, रामकृष्ण पांडेय, महेन्द्र नाथ पांडेय, अरविंद पांडेय, कृष्ण कुमार पांडेय, कमलेश तिवारी ,हिमत सिंह,अनिल तिवारी, अखिलेश तिवारी, सूरज चतुर्वेदी, मोनू सिंह, शुभम पांडेय,केदारनाथ यादव, मुन्ना यादव, राम सेवक मौजूद रहे।
कपिल तिवारी

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