निःशुल्क शिक्षा दे सरिता वर्मा सवार रही जरूरतमंद बच्चो का भविष्य,

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रिपोर्ट अमित त्रिपाठी

विश्व महिला दिवस (8 मार्च) पर विशेष कवरेज

महराजगंज रायबरेली।
कोरोना काल में विद्यालयों क़े बंद होने से भले ही बच्चों क़ी शिक्षा चौपट हुई हो किन्तु ऐसे बच्चों क़े भविष्य क़ो सजाने सवारने का जिम्मा लेकर उन्हें निःशुल्क ट्यूशन, कापी किताब आदि देकर सरिता वर्मा जैसी महिलाएं अपने जज्बे से समाज क़ो आईना दिखाने का काम कर रही। बताते चले क़ी सोमवार क़ो मनाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) पर महिलाओ क़ी स्वच्छ समाज क़े प्रति सहभागिता एवं कर्तव्य निष्ठता क़े हर एक पहलुओ पर कस्बे क़े रंधावा रोड स्थित सरिता वर्मा पत्नी मनोज कुमार वर्मा खरी उतरती है। पल्लू क़ी ओट में एक बहू एवं जरूरतमंद बच्चों क़ी अभिभावक /शिक्षिका जैसी दोहरी जिम्मेदारी निभाने क़े बारे में सरिता वर्मा बताती है क़ी कोरोना काल से पहले कस्बे क़े कई वार्डो क़े जरूरतमंद बच्चों क़ो सालो से अपने घर क़े आंगन में एक घंटे निःशुल्क शिक्षा ग्रहण कराने का संकल्प पूरे मन से चल रहा। उन्होने बताया क़ी सन 2008 में ससुर जगदीश वर्मा क़ी पहली पुण्यतिथि पर जरूरतमंद बच्चो क़ो निःशुल्क शिक्षा देने का संकल्प अपने पति मनोज वर्मा क़ी प्रेरणा से लिया था, इन 12 सालो में करीब 400 बच्चों क़ो साक्षर करने एवं स्कूल क़ी पढ़ाई का रिवीजन कराने का अवसर मिला। मालूम हो क़ी बच्चों क़ी कापी किताब, पेन पेंसिल आदि जरूरतो क़ो पूरी करने क़े साथ साथ बच्चो का जन्म दिन भी सरिता व उनके परिवार द्वारा बनाया जाता है। माँ क़े इस नेक काम में बेटा उज्जवल व विदेश में रह रही बेटी भी घर आने पर खूब हाथ बटाती है। कोरोना काल क़े बारे में सरिता वर्मा का कहना है क़ी मार्च से दिसंबर तक क्लास बंद रही किन्तु जनवरी से वह अपने अभियान में फिर से लग गयी है जिनमे मोबाइल ना होने से आनलाइन शिक्षा ना ग्रहण कर पा रहे एवं स्कूल बंद होने पर घर बैठे बच्चों क़ी सख्या ट्यूशन क्लास में प्रतिदिन करीब 50 से 60 रही। जरूरतमंद बच्चो का भविष्य सवारने क़ी कोशिश में लगी इस शिक्षिका क़े कार्यो क़ी चर्चा कस्बे ही नही अपितु क्षेत्र में भी है। जिनके प्रयासों क़ी समाज क़े प्रबुद्ध वर्ग क़े साथ साथ जरूरतमंद बच्चों क़े परिजनों द्वारा खूब सराहा जा रहा है।

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