बेटे का ख्याल रखते-रखते खुद पहुची अस्पताल, फिर भी जानती रही बेटे का ही हाल——

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नीतिका द्विवेदी


मदर्स डे स्पेशल——


बेटे को घर मे रखकर जिताई कोरोना की जंग,पर खुद पहुच गई अस्पताल


अस्पताल में हालत बिगड़ती गई पर सुध आने पर बेटे का ही हाल जानती रही


मोहनलालगंज।कहते है संसार मे एक माँ ही तो है जो अपने कलेजे के टुकड़े के लिये किसी हद तक जाकर कुछ भी कर सकती है।इसी की एक नजीर मोहनलालगंज कस्बे में भी देखने को मिली जब इस संक्रमण के दौरान अपने अपनो का साथ छोड़ रहे थे।तभी कस्बे की एक शिक्षिका का बैंक कर्मी बेटा कोरोना पाजीटिव हो गया।शिक्षिका ने अपने बेटी की सलामती के लिये दिन रात एक कर घर मे ही कोरोना की जंग जीता दी।पर खुद उसकी चपेट में आकर अस्पताल तक पहुच गई।वही ऊपर वाले ने भी इस मां को स्वस्थ कर साकुशल घर भेज दिया।

मोहनलालगंज कस्बे की रहने वाली शिक्षिका विभा मिश्रा के बेटे बैंक कर्मी आयुष मिश्रा बैंक डियूटी के दौरान कोरोना की चपेट में आ गया।बेटे की तबियत खराब होने पर विभा मिश्रा ने बेटे की सलामती के लिये इलाज के साथ उसकी देखरेख और भगवान की चौखट पर दिन रात माथा टेकती रहती।यही वजह रही है कि बेटे ने घर मे ही रहकर कोरोना की जंग जीत ली।

खुद चपेट में आकर हालत बिगड़ी तो बेटे का हाल जानती रही—
बेटे की देखभाल के दौरान जब खुद कोरोना की चपेट में आई तो हालत बिगड़ने पर पति हरगोविंद मिश्रा ने निजी अस्पताल में भर्ती कराया कई दिनों तक हालत गंभीर रही इस दौरान जब पति से मिले तो बेटे का ही हाल पूछती और उसकी ही सलामती के लिये अस्पताल में ही दुआ करती।साथ ही अस्पताल में बेटे को आने से मना कर दिया।एक सप्ताह तक अस्पताल में रहने के बाद जब घर आई तो सबसे पहले बेटे को ही देखकर भावुक हो गई ।वही बेटा आयुष भी मा को देखकर उस पल अपने को रोक न सका।

पति ने लिखी संघर्ष की कहानी——
हरिगोविंद मिश्रा के बेटे बैंक कर्मी आयुष जब कोरोना की चपेट में आये तो उस समय संडीला अपने कार्य क्षेत्र में थे।सूचना पर वहां से घर लाये और इसी बीच संडीला में रहते हुए बेटी सौम्या की भी तबियत बिगड़ गई उसे भी वहाँ जाकर घर लाये इसी बीच पत्नी की तबियत खराब होने पर अस्पताल से लेकर घर तक पूरा सफर अकेले तय किया।पन्द्रह दिनों तो संघर्ष के दौरान खुद को फिट रखकर पूरे परिवार का बखूबी ख्याल रखा।

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