रायबरेली: विद्यालय निरीक्षण बना उच्चाधिकारियों की कमाई का जरिया!

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मानव संपदा पोर्टल पर अवकाश क़े बावजूद शिक्षिका पर कार्यवाही
– अधिकारियों क़े कमाऊ पूत साबित हो रहे जिला समन्वयक अविलय सिंह

महराजगंज रायबरेली: शिक्षा विभाग में इन दिनो विद्यालय निरीक्षण उच्चाधिकारियों क़े लिए शिक्षको से कमाई का जरिया साबित होता दिखाई दे रहा। वही नियमित विद्यालय आने वाले शिक्षक शिक्षिकाओं को वेतन रोकने सरीखी कार्यवाही का खौफ दिखा मानसिक रूप से उत्पीड़ित किया जा रहा। उच्चाधिकारियों क़ी इस खाऊं कमाऊ नीति से शिक्षको में गहरा आक्रोश व्याप्त दिखाई दे रहा।
मामला 30 जनवरी 2020 दिन शनिवार का है जहां प्राथमिक विद्यालय लालगंज मजरे मोंन में जिला समन्वयक (एमआईएस) अविलय सिंह द्वारा विद्यालय बंद होने क़े आखिरी मिनटो में निरीक्षण किया गया।

आरोप है कि  निरीक्षण क़े दौरान विद्यालय क़ी शिक्षामित्र पार्वती देवी द्वारा उपस्थिति पंजिका में विद्यालय क़ी सहायक अध्यापिका मंजू लता मिश्रा को आकस्मिक अवकाश पर एवं आवागमन रजिस्टर पर प्रधानाध्यापिका नीलिमा श्रीवास्तव को बैंक क़े कार्य से जाने का विवरण लिखा दिखाया गया ।

बावजूद इसके दोनो ही शिक्षिकाओं पर वेतन रोकने जैसी कार्यवाही विभाग से क़ी गयी। मामले में सहायक अध्यापिका मंजू लता मिश्रा ने बताया क़ी उनके द्वारा 29 जनवरी क़ी शाम को मानव संपदा पोर्टल पर 30 जनवरी को आकस्मिक अवकाश क़ी अर्जी लगाई गयी जिसकी स्वीकृति अगले दिन प्रधानाध्यापिका द्वारा कर दी गयी,उपस्थिति रजिस्टर पर भी 30 जनवरी को उनके नाम क़े सम्मुख अवकाश भी दर्ज कर दिया गया। बावजूद शनिवार को निरीक्षण को आए जिला समन्वयक (एमआईएस) द्वारा कार्य में लापरवाह बरतने एवं विद्यालय ना आने का झूठा आरोप लगा वेतन रोकने सरीखी कठोर कार्यवाही क़ी गयी जिससें उनको मानसिक रूप से पीड़ा पहुंची। मालूम हो क़ी इसके पूर्व भी निरीक्षण क़े नाम पर शिक्षको क़े मानसिक उत्पीड़न एवं धन वसूली क़े प्रकरण विकासखंड में सामने आ चुके। जिससें विद्यालय निरीक्षण अधिकारियों का जेबें भरने का गोरखधंधा तो वही शिक्षा विभाग में अविलय सरीखे गुर्गे उच्चाधिकारियों क़े कमाऊ पूत साबित हो रहे। प्रकरण में जिला समन्वयक (एमआईएस)अविलय सिंह ने बताया क़ी दूसरों क़ी शिकायत पर विकासखंड में निरीक्षण करने गए थे,प्राथमिक विद्यालय लालगंज क़ी सहायक अध्यापिका मंजू लता मिश्रा पर वेतन क़ी कार्यवाही क़ी गयी थी,जिसका आदेश विभाग द्वारा
वापस ले लिया गया है। जिससें खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे सरीखी कहावत ऐसे प्रकरणों में सत्य साबित होती दिखाई देती है।

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