रायबरेली: सरकारी अस्पताल की बड़ी लापरवाही, लाखों रुपये कीमत की दवाइयां जलाई

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मनीष अवस्थी


रायबरेली। स्वास्थ्य महकमे के अजीबो ग़रीब कारनामे हर रोज़ सामने आ रहे हैं।कभी वार्डों में कुत्ते घूमने के तो कभी चिकित्सकों और दवा माफियाओं के साथ गठबंधन के।ताज़ा मामला लाखों रुपये की दवाओं को आग के हवाले किये जाने से जुड़ा है।

सीएचसी लालगंज से चंद कदम की दूरी पर लाखों रुपये की कीमत वाली दवाएं आग के हवाले कर दी गईं।जलती हुई दवाओं से उठता हुआ यह धुंआ तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है।ऐसा भी नहीं कि यह एक्सपायर्ड हों।इनमें से ज़्यादातर दवाएं अभी अक्टूबर और नवम्बर तक इस्तेमाल के लायक थीं।

दवाओं को क्यों जलाया गया इसे लेकर अधिकारी जांच की बात कहते हैं।लेकिन हैरत की बात यह कि स्वास्थ्य विभाग के मुखिया पूरे मामले को पांच घंटे तक परखते रहे और उन्हें यह अंदाजा तक न लग सका कि जलाई गई दवाओं की कीमत क्या है।यह वही सीएमओ हैं जो कस्बे में संचलित झोलाछाप डॉक्टर पर कार्रवाई करने से बचते रहे थे लेकिन डीएम की फटकार के बाद मजबूरन इन्हें कार्रवाई करनी पड़ी थी।

पूरे ज़िले में जिस तरह दवा माफिया और डॉक्टरों का गठजोड़ स्थापित है उससे सरकारी दवाओं का बचा रह जाना लाज़िमी है।बची दवाओं को काग़ज़ों में बंटी दिखा कर फिर उसे ठिकाने लगाना ही इन दवाओं को जलाए जाने के पीछे मकसद छिपा होगा।

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