कस्बे में कुकुरमुत्तो की तरह उगे निजी हॉस्पिटल, मरीजों के इलाज के साथ हो रहा है खिलवाड़

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ऋषि मिश्रा


बछरावां रायबरेली। कस्बे के अंदर कुकुरमुत्ता की तरह उगे निजी अस्पतालों में आज प्रतिस्पर्धा का दौर निरंतर जारी है। कौन सा हॉस्पिटल संचालक कितने मरीजों का इलाज कर दे, वह दिन रात यही सोचता रहता है। परंतु कभी-कभी इलाज करने के चक्कर में यह निजी अस्पताल मरीजों की जान जोखिम में डाल देते हैं, जिससे मरीजों को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ता है। ऐसा ही एक वाकया बीते 1 सप्ताह पूर्व देखने को मिला जब कस्बे मे एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों की लापरवाही से एक महिला मरीज को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। वह महिला मरीज अपने पीछे 4 बच्चों सहित एक हंसता खेलता परिवार छोड़ गई है। आए दिन निजी अस्पतालों की लापरवाही के कारण किसी न किसी मरीज को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। अब ऐसे में यह एक यक्ष प्रश्न उठना लाजमी हो जाता है कि आखिरकार कस्बे में निजी अस्पतालों की लापरवाही पर स्वास्थ्य विभाग के आका बने उच्च अधिकारियों की नजर कब तक पड़ेगी और वह इन पर कब तक लगाम कसते हुए नजर आएंगे।

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