ऐसे लोगो क़ी ही दी जाती है मिसालें, डब्बू सिंह (सिकंदरपुर) बने ”शिक्षा जगत क़े दशरथ मांझी”

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रिपोर्ट अमित त्रिपाठी

महराजगंज रायबरेली। ” लहरों से डर कर नौका पार नही होती, कोशिश करने वालो क़ी कभी हार नही होती” जी हां! छः वर्षो से किराये के भवन में शिक्षा ग्रहण कर रहे सरकारी विद्यालय में दाखिला लिए नौनिहालों क़े सपनो को जीवंत कर दिखाया सिकन्दरपुर ग्राम प्रधान प्रतिनिधि डब्बू सिंह ने। शिक्षा विभाग क़े हाथ खड़े कर लेने क़े बाद निजी खर्च से 18 लाख रुपए लगा कागजो पर संचालित दो-दो सरकारी भवनों को मूर्त रूप देने वाले प्रतिनिधि क़ी ख्याति क्षेत्र में ”शिक्षा क़े दशरथ मांझी” क़े रूप में हो रही।
बताते चले क़ी रायबरेली अमेठी बार्डर पर स्थित विकासखंड महराजगंज क़े ग्रामीण सिकंदरपुर स्थित पूरे चोप सिंह व सेमरहा गांव क़े प्राथमिक विद्यालय में नामांकित नौनिहालो को बिना भवन, कक्ष, खेल मैदान, रसोईघर एवं बिना शौचालय क़े ही पढ़ाई पूरी करनी पड़ती थी। मालूम हो क़ी 2012 से संचालित प्राथमिक विद्यालय पूरे चोप सिंह पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिकन्दरपुर व प्राथमिक विद्यालय सेमरहा गांव के एक निजी मकान में संचालित हो रहे थे जिसके भवन के निर्माण के लिए शासन द्वारा 2013 में प्रति विद्यालय 5 लाख 1 हजार 8 सौ रूपये भेजे गये। किन्तु विद्यालय न बन पाने से इन विद्यालयों नौ पंजीकृत नौनिहाल किराये के भवन में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर रहे। गांव क़े नौनिहालों
द्वारा किराए क़े भवन में पढ़ने से आहत प्रधान प्रतिनिधि ने बताया क़ी भवन निर्माण क़े लिए शिक्षा विभाग में कई बार गुहार लगाई और निर्माण कराने क़े लिए काफी दौड़ भाग क़ी किन्तु मंहगाई इतनी बढ़ चुकी थी कि सरकारी मद से विद्यालय भवन का निर्माण कराना असंभव है क़ी बात कह बेसिक शिक्षा विभाग ने भवन निर्माण से अपने हाथ खड़े कर दिये। डब्बू सिंह ने बताया क़ी नौनिहालों क़ी स्थिति देख दिन रात मन कचोटता था जिस पर दोनो ही विद्यालयों क़े निर्माण का संकल्प लिया गया और इन विद्यालयों में विद्यालय भवन, बाउण्ड्री वाल, हैण्डपम्प, रसोई घर व शौचालय का निर्माण कराया गया। जिसमे कुल 28 लाख रुपए क़ी लागत आई जिसमे 10 लाख रुपए विभाग द्वारा प्राप्त हुए। इस कार्य से जहां क्षेत्र क़े लोग दंग है वही खुद का भवन पाकर बच्चों का मन फूले नही समा रहा। ग्रामीण महेंद्र अवस्थी, अंकुर अवस्थी, विनोद, राजनाथ शर्मा, रवि सिंह, गणेश शंकर मिश्रा आदि ने बताया क़ी मंदिर, मस्जिद, शिवालो का निर्माण लोग नाम क़े लिए करते है किन्तु अपने धन से विद्यालय निर्माण वो भी सरकारी, सही मायनो में ऐसे लोगो क़ी ही इतिहास में मिसालें दी जाती है।

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