सीईएल ‘सक्षम’ शिवगढ़ की वैज्ञानिक सलाह एवं तकनीकी सहयोग से हापुड,मेरठ,बागपत में नर्सों की कार्यशाला सम्पन्न

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हापुड,मेरठ,बागपत की नर्सों को दिया गया केएमसी एवं एमएनसीयू का प्रशिक्षण


मेरठ मण्डल में 66 एमएनसीयू बनकर तैयार


रायबरेली। रायबरेली जिले के विकास क्षेत्र शिवगढ़ अन्तर्गत शिवगढ़ कस्बे में स्थित कम्युनिटी एंपावरमेंट लैब – सक्षम शिवगढ़ की वैज्ञानिक सलाह एवं तकनीकी सहयोग व राज्य सरकार एवं एनएचएम के समन्वित सहयोग से यूपी के मेरठ मण्डल में जनपद गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ, बागपत, बुलंदशहर, गौतम बुद्धनगर सहित सभी 6 जिलों के पीएचसी, सीएचसी व जिला महिला अस्पताल को मिलाकर कुल 66 एमएनसीयू बनकर तैयार हो गए हैं। जिनमें कार्यरत हापुड़,बागपत,मेरठ जिले की नर्सों की एक-एक दिवसीय कार्यशाला सम्पन्न हुई। हापुड़ में जहां सीएमओ ऑफिस में कार्यशाला आयोजित की गई तो वहीं बागपत और मेरठ में महिला जिला अस्पताल में कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में नर्सों को केएमसी एवं एमएनसीयू की उपयोगिता के विषय में विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यशाला में नर्सों को केएमसी देने का सही तरीका बताया गया। उन्हें बाइंडिंग की जानकारी दी गई, कि किस प्रकार महिलाएं बाइंडर बांधकर नवजात शिशु को केएमसी देने के साथ- साथ घरेलू एवं रोजमर्रा के कार्य कर सकती हैं। कार्यशाला में नर्सों को प्रशिक्षण देने के लिए सीईएल द्वारा ए और बी 2 टीमें बनाई गई जिसमें ए टीम में नर्स कोच सीमा, अग्रिमा मीनू,अपूर्व, सुधीर शामिल रहे जिनके द्वारा सीएमओ ऑफिस हापुड़ में 2 दिनों की कार्यशाला में प्रशिक्षण दिया गया। प्रत्येक दिन 19 – 19 नर्सों को प्रशिक्षण दिया गया। वहीं बागपत जिला महिला अस्पताल में आयोजित कार्यशाला में प्रत्येक दिन 19 – 19 नर्सों सहित कुल 76 नर्सों को प्रशिक्षण दिया गया। हापुड और बागपत में आयोजित कार्यशाला में बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.राज, हॉस्पिटल मैनेजर चैतन्य ने भी प्रतिभाग किया। कार्यशाला में बागपत सीएमओ डॉ.दिनेश कुमार सिंह,एसीएमओ,हापुड़ में सीएमओ डॉ.रेखा गुप्ता, एसीएमओ डॉ.वेद ने अपने विचार साझा किए। वहीं बी टीम में नर्स कोच जैस्मिन, आनन्द कुमारी यादव, प्रशांत, कृष्णा सिंह द्वारा मेरठ के जिला अस्पताल में आयोजित 3 दिनों की कार्यशाला में प्रत्येक दिन 20-20 नर्सों को केएमसी एवं एमएनसीयू की उपयोगिता की विस्तृत रूप से जानकारी देते हुए प्रशिक्षण दिया। नर्सों को बताया गया कि नवजात शिशुओं की माताओं को किस प्रकार केएमसी देने के लिए प्रेरित करें, किस प्रकार काउंसलिंग करें और केएमसी देने का सही तरीका क्या है। केएमसी देने के लिए बाइंडर किस प्रकार बांधे। कार्यशाला में शामिल सीएमओ डा.अखिलेश मोहन, एसीएमओ डॉ.पूजा अस्पताल प्रबंधक नुपुर, सीएमएस डॉ. सुमन सिरोही ने नर्सों को केएमसी के जादुई करिश्मे की जानकारी देते हुए कहा कि केएमसी कुदरत का वह करिश्मा है जिससे कम वजन अथवा समय से पूर्व जन्मे लो बर्थ वेट नवजात शिशुओं का बगैर किसी दवा के तीव्र गति से शारीरिक व मानसिक विकास होता है। ज्ञात हो कि मेरठ मंडल में सबसे पहले बुलंदशहर के कस्तूरबा महिला जिला चिकित्सालय में एक आदर्श मॉडल के तौर पर 20 बेडों का एमएनसीयू वार्ड बनाया गया था।
जो किसी भी मायने में पांच सितारा होटल के रूम से कम नहीं है। जिसमें समय से पूर्व जन्मे अपरिपक्व, लो बर्थ वेट नवजात शिशुओं और माताओं को वीआईपी उपचार मिल रहा है। जिससे प्रेरित होकर मेरठ मण्डल के आयुक्त सुरेंद्र सिंह ने मेरठ मण्डल के सभी ऐसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों जहां प्रतिदिन कम से कम 10 प्रसव होते हैं व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, महिला जिला चिकित्सालयों में एमएनसीयू बनाए जाने की पहल की थी। जिनके सार्थक प्रयासों से मेरठ मंडल में 66 एमएनसीयू बनकर तैयार हो गए हैं। मेरठ मंडल में संचालित सभी एमएनसीयू के संचालन में कम्युनिटी एंपावरमेंट लैब वैज्ञानिक सलाह एवं तकनीकी सहयोग प्रदान कर रही है।

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