इस गौशाला में तड़प तड़प क़े मर रहे गौवंश,बने कुत्तो और कौवों का निवाला! आक्रोश

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रिपोर्ट अमित त्रिपाठी
महराजगंज रायबरेली। जिन गौवंशो क़ी सेवा को प्रदेश का मुखिया अपना राजधर्म समझता हो,जिनके माथे को सहलाती मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ क़ी तस्वीरें पूरे देश ने देखी हो, बावजूद इसके क्षेत्र क़े पूरे जमादार मजरे बावन बुजुर्ग बल्ला स्थित गौशाला क़े ठीक सामने गौवंशो क़े खुले में पड़े छः मृत शरीरो को कुत्ते और कौवे पेट का निवाला समझ अपनी भूख मिटा रहे। चौंकिए नही, यह गौचर गौशाला में तड़प तड़प क़े मरने क़े बाद ठेकेदार क़े कहने पर गौशाला से ही बाहर फेंके गए है। यह कहना गौशाला क़ी देख रेख कर रहे चौकीदार एवं स्थानीय ग्रामीणों का है।
बताते चले क़ी जिला पंचायत से 2019 में निर्मित पूरे जमादार मजरे बावन बुजुर्ग बल्ला स्थित गौशाला जिम्मेदारो क़ी लापरवाही एवं गैर जिम्मेदाराना रवैए क़े चलते गौवंशो क़ी कब्रगाह साबित हो रही। जिनका जीता जागता उदाहरण गौशाला क़े सामने खुले में फेंके मिले चार पशुओ क़े शव है। इस दौरान ग्रामीणों ने गौशाला क़े बगल स्थित धान क़ी फसलों में भी गौचरों क़े फेंके गए दो मृत शरीर को दिखलाया जिससें जिम्मेदारों क़ी मानवीय संवेदना एवं गौसेवा क़े ढोंग को बखूबी समझा जा सकता है। मालूम को क़ी पूरे जमादार गौशाला से मात्र आधे किलोमीटर क़े अंदर ही पूरे सिंघई, पूरे जमादार, पूरे सहामत, सेनपुर जैसे गांवों में आबादी बसी है, मृत गौवंशो से उठती बदबू से इन गांवों क़े लोगो क़े स्वास्थ्य से खिलवाड़ एवं संक्रमण फैलने,दोनो का खतरा बनाए है किन्तु कुंभकर्ण नींद सों रहे अफसरों को कोई परवाह नही। स्थानीय ग्रामीण रामकुमार बताते है क़ी गौशाला क़े बगल उनका खेत है जिसमे गौशाला क़े चौकीदारों द्वारा मृत गौवंश फेंके गए, फसल पकी है ऐसे में कौन काटने आएगा। वही शोभनाथ ने बताया क़ी गौशाला से 50 मीटर क़ी दूरी पर घर है खुले में मृत गौचरों क़े शवों से घर तक बदबू आती है बच्चे खाना तक नही खा सकते। राजकुमारी ने बताया क़ी कुत्ते मुंह में मांस का टुकड़ा लेकर पूरे गांव में घूमते है और इधर उधर फेंकते है। ग्रामीणों क़ी दास्तां को सुन गौशाला क़ी बेइन्तेजामी एवं जिम्मेदारों क़ी उदासीनता को भली भांति समझा जा सकता है। हद तो तब हो गयी जब प्रकरण क़ी तहकीकात करने पर रविवार क़ी सुबह 10 बजे तक गौशाला क़े गेट पर ताला ही लटकता देखा गया। जिस पर ग्रामीणों ने बताया क़ी 10-11 बजे से पहले यहां कोई चौकीदार अथवा देखरेख करने वाला नही आता और शाम 5 बजे तक गेट बंद कर चला जाता है, देख भाल एवं भूसा चारा समय से ना मिलने क़े चलते गौवंशो क़ी मौते गौशाला में प्रतिदिन हो रही है। इस दौरान मौके पर पहुंचे गौशाला कर्मियों बबलू, भानू, राजन ने मृत गौवंशों को दफनाने क़े बजाए खुले में फेंके जाने क़े बाबत बताया क़ी ये निर्देश गौशाला ठेकेदार धनंजय सिंह से प्राप्त हुए है, हम लोग मजबूर है। जिससें योगी राज में जिम्मेदारों द्वारा गौवंशो क़ी दुर्दशा क़ी हिमाकत करने वालो क़े हौसलों को समझा जा सकता है। मामले में पशु चिकित्सक रामसबद ने दूरभाष पर बताया क़ी गौशाला में किसी भी पशु क़ी मौत नही हुई। पशु चिकित्सक से जब कर्मियों द्वारा गौशाला में शनिवार को तीन पशुओ क़ी मौत होने एवं खुले में फेंकने क़ी बात स्वीकारने क़ी बात बताई गयी तो महोदय बगले झांकते महसूस किए गए। वही जिला पंचायत अधिकारी जी क़े सिंह ने मामले क़ी जांच कराए जाने क़ी बात कही है।
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