अनुकृति मामले में जांच करने आई हवा हवाई टीम हुई हवा हवाई

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रिपोर्ट ऋषी मिश्रा


खाता न बही सीएमओ जो करे वही सही


बछरावां रायबरेली। बीते 2 जून से चल रहे जस्टिस फॉर अनुकृति चौरसिया का मामला तूल पकड़ता हुआ नजर आ रहा है। तमाम जद्दोजहद के बाद परिजनों के धरना प्रदर्शन के पश्चात मुख्य चिकित्सा अधिकारी रायबरेली डॉ० वीरेंद्र सिंह द्वारा रविवार के दिन उक्त प्रकरण की जांच के लिए एक हवा हवाई टीम गठित की गई। जिसमें अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी खालिद रिजवान, नम्रता राय, डॉ० एके चौधरी, अनुपम श्रीवास्तव को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बछरावां जांच के लिए भेजा गया। जाँच टीम द्वारा पीड़ित अनुकृति चौरसिया के परिजनों को दूरभाष के माध्यम से एक अज्ञात नंबर 89790 44649 के माध्यम से सूचना दी गई। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे प्रसूता के भाई हरीश चौरसिया ने जांच टीम से मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा विधिक कमेटी से जांच टीम का लिखित ब्योरा मांगा। इतना सुनते ही अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी भड़क गए और उन्होंने सीएचसी के अंदर पीड़िता के भाई को खरी खोटी सुनाना शुरू कर दिया, और तुमको देख लेने की बात भी कहने लगे। और साथ ही साथ अपने पद की सफाई देते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी का नाम लेते हुए पीड़िता के भाई को धमकाने लगे। ऐसी हरकतों को देखकर यह साफ जाहिर होता है जनपद का स्वास्थ्य विभाग पूर्ण रूप से भ्रष्ट हो चुका है। अब गौर तलब है कि जब ऐसे आला अधिकारी जांच करने आएंगे तो नतीजा क्या होगा। क्या किसी को न्याय मिल सकेगा यह एक प्रश्नवाचक चिन्ह है? काफी जद्दोजहद के बाद आखिरकार नतीजा शून्य रहा। मामला ज्यों का त्यों छोड़कर बिना जांच किए हवा हवाई टीम रायबरेली बैरंग वापस हो गई।

इनसेट 1: क्या कहते हैं मुख्य चिकित्सा अधिकारी रायबरेली:- पीड़िता के भाई हरीश चौरसिया द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी से जांच टीम की लिस्ट मांगी जाती है तो उनका साफ तौर पर कहना होता है कि आप तो अधिवक्ता हैं कितने दिनों में मुकदमा फाइनल करा देते हैं। जांच है समय लगेगा।

इस बाबत हरीश चौरसिया का कहना है की अगर मुझे न्यायालय जाना होता तो मैं आपके पास न्याय की गुहार क्यों लगाता। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हमें लगता है पूरे अस्पताल तंत्र के ऊपर कहीं न कहीं सीएमओ साहब की मेहरबानी है और जितनी भी घटनाएं होती हैं और जितनी भी बहन बेटियां यहां पर डॉक्टरों की लापरवाही का शिकार होती हैं उसमें सीएमओ साहब की संलिप्तता पूर्ण रुप से दिखाई दे रही है।

क्या कहते हैं सीएचसी अधीक्षक अनिल कुमार जैसल: अधीक्षक का कहना है कि मेरे हाथ में कुछ नहीं है जो भी करना है आप ऊपर से बात करिए, और मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा उक्त प्रकरण के संबंध में कोई लिखित शासनादेश प्राप्त नहीं हुआ है।

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