प्रदेश में भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके वित्तविहीन शिक्षकों को राहत पैकेज दे सरकार: उमेश द्विवेदी

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रिपोर्ट ऋषि मिश्रा


बछरावां रायबरेली। प्रदेश में वित्तविहीन शिक्षकों की समस्याओं को लेकर शिक्षा के एम एल सी उमेश द्विवेदी ने सरकार से मांग की है कि प्रदेश के लाखों वित्तविहीन शिक्षक कोरोना के कारण विद्यालय बन्द होने व वेतन प्राप्त न होने से अपना व परिवार का जीवनयापन भी नही कर पा रहे है। विद्यालयों में न के बराबर शुल्क आया है, जिससे अधिकांश प्रबंधकों ने शिक्षकों व कर्मचारियों को वेतन देना कई महीनों से बन्द कर दिया है। यह शिक्षक प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा में 87% भागीदारी रखते हैं। पर आज दीन हींन दशा में हैं।
बोर्ड परीक्षा में कक्ष निरीक्षक,केंद्र व्यवस्थापक, व मूल्यांकन करके इन्हें कुछ आय हो जाती थी लेकिन परीक्षा निरस्त होने से इन पर और भी आपदा आ गयी है।पूरे प्रदेश में लाकडाउन के कारण विद्यालय पूरी तरह बन्द हैं।आगे भी कब तक बन्द रहेंगे कहा नही जा सकता यह अन्य कोई कार्य भी नही कर सकते।
बोर्ड द्वारा प्रत्येक छात्र से 500-600 रुपये परीक्षा मद में लिए गए हैं जो अरबो रुपये हो रहा है, यदि इसी पैसे से कोरोना राहत दे दी जाय तो भी इस आपदा में वित्तविहीन शिक्षकों के आंसू पोछे जा सकते है ।
वर्तमान परिस्थिति में शिक्षक व कर्मचारी बहुत ही दुखी, हताश,निराश है,शिक्षकों व कर्मचारियों में सरकार के प्रति नकारात्मक संदेश जा रहा है तथा संगठन व सरकार के प्रति शिक्षकों में अविश्वास पैदा हो रहा है । अतः गम्भीरतापूर्वक अति उदार मन से विचार करते हुए जीविकोपार्जन भरके लिए कोरोना राहत पैकेज उक्त शिक्षकों को दिए जाने का आदेश-निर्देश संबंधितों को देने का कष्ट करें,जिससे इन शिक्षकों/कर्मचारियों का भी जीविकोपार्जन हो सके।

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