भगवान को जो भाव से थोड़ा सा देता उसे सम्पूर्ण सुख  भगवान प्रदान करते हैं——- 

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नीतिका द्विवेदी

निगोहां।हदयालपुर में चल रही सात दिवसीय कथा के आयेाजन  में पंडित गोपाल  शास्त्री आचार्य श्याम व फूलचंद्र के द्वारा भजनों की वर्षा कर श्रोता भक्तों को आनन्द विभोर कर दिया। इस अवसर पर बालगोपाल के जन्म की झांकी प्रस्तुत हुई कृष्ण जन्म पर गद्दी सेवको ने फूलों की वर्षा करते हुए शिशु कृष्ण-वासुदेव झांकी की आरती उतारी।वही भागवत मर्मज्ञ पूज्य पंडित गोपाल शास्त्री महाराज ने कथा को आगे बढ़ाते हुए कृष्ण जन्म के प्रसंग का बड़ा सुंदर चित्रण किया कृष्ण जन्मोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने माखन मिश्री का भोग लगाकर जमकर उत्सव मनाया।

श्री कृष्ण जन्म के अवसर पर नन्दोत्सव प्रसंग से कथा का रसपान कराते श्री शास्त्री  महाराज ने भगवान की माखन चोरी लीला और पूतना वध जैसे रोचक प्रसंग पर विस्तार से प्रकाश डाला। महाराज जी ने कहा कि भगवान की लीला जीवनोपयोगी है, इसे आत्मसात कर हम अपना यही लोक और परलोक दोनों सुधार  भगवान कृष्ण की लीला के प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि भगवान को जो भाव से थोड़ा देता है उसे भगवान संपूर्ण सुख प्रदान कर देते हैं।

गोवर्धन का पर्वत के प्रसंग में कहा कि श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत मात्र इसीलिए उठाया था कि पृथ्वी पर फैली बुराइयों का अंत केवल प्रकृति एवं गौ संवर्धन से ही हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर हम बिना कर्म करे फल की प्राप्ति चाहेंगे तो वह कभी नहीं मिलेगा, कर्म तो हमें करना ही होगा।

घमंड तोड़ इंद्र का, प्रकृति का महत्व समझाया।

ऊँगली पर उठाकर पहाड़, वो ही रक्षक कहलाया

ऐसे बाल गोपाल लीलाधर को बारम्बार प्रणाम..

कथावाचक ने गोवर्धन पर्वत की कथा सुनाते हुए कहा कि इंद्र के कुपित होने पर श्रीकृष्ण ने गोवर्धन उठा लिया था। इसमें ब्रजवासियों ने भी अपना-अपना सहयोग दिया। श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए राक्षसों का अंत किया ।इस मौके पर मंदिर में गिरिराज पर्वत की झांकी सजाई गई एवं अन्नकूट एवं छप्पन भोग लगा कर श्रद्घालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

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