वित्तविहीन शिक्षकों ने चलाई सोशल मीडिया में मानदेय के लिए बड़ी मुहिम

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रिपोर्ट ऋषि मिश्रा


जब तक शिक्षक भूखा है, ज्ञान का सागर सूखा है: अरुण सिंह


बछरावां रायबरेली :यूपी की माध्यमिक शिक्षा में 87%से भी अधिक का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रदेश के साढ़े तीन लाख वित्तविहीन शिक्षकों ने प्रांतीय नेतृत्व के आवाहन पर 15 जून को सोशल मीडिया पर मानदेय सहित अपनी मांगों के समर्थन में दोपहर 1 बजे से बड़ी मुहिम चलाई,देखते ही देखते फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर आदि सोसल साइट्स पर लाखों की संख्या में पोस्टें तैरने लगीं।पूरे दिन सरकार का खुफिया तंत्र जानकारी जुटाने में लगा रहा।मुहिम में शिक्षक महासभा के प्रदेश अध्यक्ष/एमएलसी उमेश द्विवेदी सहित प्रदेश के नेता,शिक्षक एमएलसी और शिक्षक व प्रधानाचार्यो ने बड़ी संख्या में प्रतिभाग किया।
शिक्षकों ने सरकार से 3 सवाल पूँछे—

१-वित्तविहीन शिक्षकों को मिलने वाले 1000 रुपये के सरकारी मानदेय को 4 वर्षो से बन्द करने का आधार क्या है।
२-सरकार बने 4 वर्ष बीत गए पर वादे के अनुसार अभी तक वित्तविहीन शिक्षकों की सेवा सुरक्षायुक्त नियमावली क्यों नही बनी।
३-बोर्ड की परीक्षा निरस्त हो चुकी है पर परीक्षा के लिये लिया गया अरबों रुपये का परीक्षा शुल्क शिक्षकों को क्यों नही जबकि इस शुल्क द्वारा ही इन्हें कक्ष निरीक्षक,मूल्यांकन का पैसा मिलता है।
शिक्षकों ने अनेक प्रकार के स्लोगन लिखकर पोस्ट के साथ टैग किये।उनकी टैग लाइन रही “”‘जब तक शिक्षक भूखा है।
ज्ञान का सागर सूखा है””‘
उक्त स्लोगन काले बैकग्राउंड पर लिखा गया।
माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा, रायबरेली के जिलाध्यक्ष पुष्पेन्द्र तिवारी व जिला कोषाध्यक्ष अरुण प्रताप सिंह चौहान ने बताया कि यह मुहिम सरकार तक अपनी वेदना शांति पूर्वक बिना भीड़भाड़ किये चलाई गई।एक तरफ कोरौना के कारण 2 वर्ष से विद्यालय बन्द होने के कारण वेतन नही मिल रहा,सरकारी मानदेय भी 4 वर्ष से बन्द है,ऐसे में इन शिक्षकों को परिवार चलाने के लिए घरों का सामान तक गिरवीं रखना पड़ रहा है,बड़े दुख का विषय है समाज को शिक्षा देने वाला यह समाज आज भूखों मरने पर मजबूर है,अगर सरकार सीघ्र हमारी सुनवाई नही करती तो हम सड़क पर बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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