दर-दर की ठोकरें खाने के बाद भी नहीं मिला आवास

0
183

ऋषि मिश्रा


कई बार ग्राम प्रधानों से कहने के बावजूद आवास के लिए मिला सिर्फ आश्वासन


आवाज के लिए बुद्धिलाल ने ग्राम प्रधान से लेकर वीडियो तक की चौखट पर दी दस्तक


बछरावां रायबरेली। जी हां एक पुरानी कहावत है कि आदमी का निहायत सीधा होना कभी-कभी उसके लिए अभिशाप साबित हो जाता है। इसी कहावत के अनुरूप एक वाक्या विकास क्षेत्र कसरावा ग्राम सभा में देखने को मिला जहां के निवासी बुद्धिलाल जो कि आजादी के 75 वर्षों बाद भी आज आवास के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। बात की जाए बुद्धि लाल की तो वह शारीरिक रूप से विकलांग है। उनकी दो बेटियां, दो बेटे हैं जिसमें एक बेटे की शादी हो चुकी है। बुद्धि लाल की पत्नी सुमन पति की विकलांगता के कारण परिवार का पालन पोषण करने के लिए लखनऊ मजदूरी करने जाती है। इस संबंध में जब संवाददाता ने पीड़ित बुद्धिलाल से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि बीते कुछ वर्ष पूर्व दुर्घटना में मेरा हाथ टूट गया था उसके बाद से मैं शारीरिक रूप से विकलांग हो गया। कई बार मैंने पूर्व में गांव के ग्राम प्रधानों से लेकर आवास का प्रार्थना पत्र लिए खंड विकास अधिकारी तक की चौखट का दरवाजा खटखटाया। परंतु निहायत सीधा होने के कारण मुझे सिर्फ आश्वासन देकर हर बार वापस कर दिया गया। इसी कड़ी में उन्होंने यह भी कहा कि कई बार मैंने ग्राम पंचायत अधिकारियों से भी अपना आवास बनवाने की गुहार भी लगाई, परंतु ग्राम पंचायत अधिकारी द्वारा यह कहा गया कि पूर्व में आपकी ग्राम सभा का नेतृत्व कर रहे ग्राम प्रधान आपका आवास बनवाना चाहते थे ही नहीं। इस संबंध में जब ग्राम सभा की मौजूदा ग्राम प्रधान श्रीमती सरोजिनी से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि इनका नाम लिस्ट में है इस बार जो भी आवास ग्राम सभा को प्राप्त होंगे उसमें जल्द से जल्द इनका आवास बनवाने का काम किया जाएगा। अब ऐसे में यह प्रश्न उठना लाजमी हो जाता कि आखिरकार क्या निहायत सीधा होना अभिशाप है, क्योंकि बुद्धिलाल की निहायत सिधाई पर उसे सरकारी योजनाओं से वंचित रहना पड़ रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.