कांग्रेस प्रत्याशी आरती सिंह व भाजपा समर्थित रंजना चौधरी ने अध्यक्ष पद किया नामांकन…

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मनीष अवस्थी


रायबरेली। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा व कांग्रेस ने अपने-अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं कांग्रेसमें पूर्व सांसद अशोक सिंह की बहू आरती सिंह पर दांव लगाया है तो वही भाजपा ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीती रंजना चौधरी पर भरोसा जताया है दोनों प्रत्याशियों ने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित कलेक्टर न्यायालय न्यायालय में अपना नामांकन दाखिल कर दिया हैं।
कांग्रेस के गढ़ रायबरेली में कांग्रेस ने पूर्व सांसद अशोक सिंह की बहू व कांग्रेसी नेता मनीष सिंह की पत्नी पर जिला पंचायत अध्यक्ष पद का दांव खेला है। बीते शुक्रवार को प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने रायबरेली आकर अध्यक्ष पद के अधिकृत प्रत्याशी के रूप में आरती सिंह के नाम की घोषणा की थी। लाव लश्कर के साथ पहुंची आरती सिंह ने कलेक्टर न्यायालय में अपना नामांकन प्रस्तुत किया ।उनके साथ उनके पति मनीष सिंह, जिला अध्यक्ष पंकज तिवारी, कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेंद्र भदौरिया, महिला विंग की अध्यक्ष शैलजा सिंह, कांग्रेसी नेता निर्मल शुक्ला, प्रवक्ता विनय द्विवेदी, ब्लॉक अध्यक्ष अजीत सिंह सहित सैकड़ों कांग्रेसियों ने नामांकन में भाग लिया। हालांकि न्यायालय के अंदर आरती सिंह के साथ चार लोगों को ही जाने की अनुमति मिली। आरती सिंह ने दो सेट में अपना पर्चा भरा। इतना ही नहीं आरती सिंह ने सांसद सोनिया गांधी व प्रियंका गांधी सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा जीत के बाद पार्टी के बनाए मापदंडों पर काम करके विकास को गति देने का काम करूंगी।
भारतीय जनता पार्टी ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए रोहनिया प्रथम से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विजई हुई रंजना चौधरी पर विश्वास किया है। रंजना चौधरी को जिला पंचायत अध्यक्ष पद का प्रत्याशी घोषित करने के बाद भाजपाई खेमे में थोड़ी सुगबुगाहट जरूर हुई लेकिन नामांकन के समय जनपद के दोनों भाजपा विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह व राम नरेश रावत सहित भाजपा एमएलसी दिनेश सिंह व अन्य भाजपाई एकजुट दिखे। रंजना चौधरी अपने समर्थकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंची और जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय में चार सेट में अपना नामांकन प्रस्तुत किया । नामांकन करने के बाद निकली रंजना चौधरी ने भी अपनी पार्टी के नेताओं को धन्यवाद दिया और जीत का दावा करते हुए कहा जनता के विश्वास पर खरा उतरूंगी।
रायबरेली को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है और पूरे प्रदेश में कांग्रेस भी रायबरेली की जनता व लोगों पर विश्वास करती है तभी बिना किसी औपचारिकता के जो भी गांधी परिवार का व्यक्ति चुनाव लड़ता है उसको यहां से विजय प्राप्त होती है। चूंकि कांग्रेस प्रदेश में लड़खड़ाने की अवस्था में है इसलिए रायबरेली में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर जीतना कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम करेगा। यही कारण है कि सपा से अध्यक्ष पद के दावेदार प्रत्याशी विक्रांत अकेला को पार्टी ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। बता दूं सबसे पहले विक्रांत अकेला ने ही जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए पर्चा खरीदा था लेकिन नामांकन के दिन केवल सपा व कांग्रेस व भाजपा के ही कैंडिडेट ने नामांकन किया। सूत्रों के अनुसार सपा का प्रत्याशी इसलिए मैदान में नहीं आया क्योंकि सपा कांग्रेस के प्रत्याशी को विजयश्री दिलाने के पूरे मूड में है क्योंकि यह चुनाव पूर्णतः मैनेजमेंट का चुनाव हो चुका है। इसलिए अब देखना यह है कि ऊंट किस करवट बैठता है।

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