बवासीर(पाइल्स) रोग के ज्योतिष कारण

0
225

मेष लग्न: – शनि द्वादश भाव में, मंगल छठे भाव में, बुध अष्टम भाव में हों, तो बवासीर होती है। वृष लग्न: गुरु चतुर्थ भाव में, शनि दशम भाव में, मंगल सप्तम भाव में, शक्रु अष्टम होने से बवासीर होती है.. मिथुन लग्न: गुरु- शनि अष्टम भाव में, बुध और मंगल चतुर्थ भाव में हों, तो बवासीर रोग होता है। कर्क लग्न: शनि दशम भाव में, मंगल पंचम में, बुध अष्टम भाव में, चंद्र-शुक्र अष्टम भाव में हों, तो गुदा संबंधित रोग होते हैं। सिंह लग्न: शनि लग्न में हो, बुध-मंगल सप्तम भाव में हों, सूर्य षष्ठ भाव में, शक्रु अष्टम में हो बवासीर होती है कन्या लग्न: चंद्र-मंगल अष्टम भाव में, शनि तृतीय भाव में, बुध द्वादश भाव में हो तो बवासीर रोग होता है।* *वृश्चिक लग्न: मंगल द्वितीय भाव में, शनि-बुध अष्टम भाव में, गुरु द्वादश भाव में हो, तो गुदा संबंधित रोग होते हैं। तुला लग्न: गुरु अष्टम भाव में, शनि सप्तम भाव में मंगल और लग्नेश से युक्त हो, चंद्र तृतीय स्थान पर हो, तो गुदा रोग होते हैं। धनु लग्न: मंगल अष्टम भाव में, शनि एकादश भाव में, शुक्र लग्न में, गुरु पचंम में हो तो गूदा सम्बंधित रागे होते है…. मकर लग्न: गुरु लग्न में, बुध-शनि अष्टम भाव में, मंगल पंचम भाव में हों, तो बवासीर होती है। कुंभ लग्न: शनि एकादश भाव में, मंगल पंचम भाव में, गुरु-चंद्र अष्टम भाव में होने से गुदा संबंधित रोग होते हैं। मीन लग्न: शनि अष्टम भाव में बुध के साथ हो, मंगल-शुक्र पंचम भाव में हों और गुरु एकादश में रहने से गुदा संबंधित रोग होते हैं।

*नोट यह सामान्य ग्रह स्थिति का वर्णन है सटीक गणना जन्मपत्रिका से ही सम्भव है*

यदि आपको किसी प्रकार की कोई समस्या बनी हुई है तो अपना बर्थ डिटेल्स हमे what’s app Number 080786-65041 पर सेंड करे…..वह अपनी जन्मपत्रिका अनुसार सरल उपाय प्राप्त करे… *
*Consultant चार्जेज अप्लाई

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.