अमेठी:आज से घरों में कैद हो गए थे हम,कोरोना के 1 साल

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अमेठी से संजय यादव की रिपोर्ट

अमेठी 25 मार्च को लॉकडाउन का पहला दिन था और लोग पूरी तरह घरों में कैद हो गए थे।पूरे देश में एक साथ लॉकडाउन लगने से पूर्व रात के समय बाजार पूरी तरह से खुले दिखाई पड़े थे। परचून की दुकान हो या सब्जी मण्डी या फिर मैडिकल स्टोर। सभी आवश्यक दुकानों पर आपाधापी का माहौल था और लोग अपने घरों के लिए 21 दिनों का राशन पूरा करने की तैयारी में लगे हुए थे। हालांकि डीएम द्वारा खाद्य पदार्थों एवं दवाई की दुकानों को सुबह 6 से 6 बजे तक खोलने की घोषणा भी कर दी गयी थी मगर बावजूद उसके लोगों को इस बात पर भी यकीन नहीं हो रहा था कि लॉकडाउन के बाद सुबह के समय बाजार खुलेंगे।

24 मार्च की रात्रि लगभग एक-डेढ बजे तक बाजारों में पूरी तरह चहल पहल और घरेलू सामान खरीदने के लिए हाय तौबा दिखाई दी थी। सिगरेट,पान,गुटखा एवं शराब की दुकानों पर भी ऐसी ही भीड़ देखने को मिली थी,क्योंकि जिन लोगों से उक्त सभी वस्तुएं सेवन करने से नहीं रहा जाता,उन्होंने भी अपने अपने 21 दिन के कोटे पूरे कर लिये थे। लॉकडाउन की घोषणा के बाद किसी को यकीन नहीं आ रहा था कि जीवन में ऐसा भी कोई दौर आएगा कि 21 दिन हरेक व्यक्ति को घर में कैद रहना पड़ेगा, लेकिन लॉकडाउन के पहले दिन से ही आमजन को अहसास हो गया था कि प्रधानमंत्री ने जो कह दिया वह अटल सत्य है। और अब पूरे 21 दिन हम घरों से बाहर नहीं निकल पाएंगे। लॉकडाउन का यह पहला दिन बड़ी ही बेचैनी भरा निकला था। सुबह से शाम तक काम करने वाले लोग जब घरों में कैद हुए तो कोई अपने बच्चों के साथ लूडो,कोई कैरम तो कोई शतरंज खेलता देखा गया। छज्जे व गली के किनारों पर खडे होकर बार-बार झांकना और पुलिस के आने पर वापस घर की ओर दौड़ लगाना लॉकडाउन के पहले दिन पूरे जनपद में आंख मिचौली पुलिस व आम लोगों के बीच खेलते देखा गया। शहर ही नहीं गांव की सड़कें भी सन्नाटे में बदल गयी। सड़कों पर सिर्फ आवारा पशु ही दिखाई पड़े या फिर अपनी ड्यूटी को अंजाम देने हेतु पत्रकार,पुलिसकर्मी,डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी या फिर सफाईकर्मी ये लोग ही सड़कों पर मौजूद रहे। आज 25 मार्च 2021 को लॉकडाउन के प्रथम दिन की यादें पुनः ताजा हो गयी कि बीते साल आज का दिन कैसा रहा। किस तरह कोरोना ने हमें 21 दिन के लिए घरों में कैद रहने पर मजबूर कर दिया था। शायद यह दौर कभी भी आंखों से ओझल नहीं हो पाएगा।

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