बेहद दिलचस्प है, गौरीगंज विधानसभा सीट…समझिए समीकरण?

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अमेठी की गौरीगंज विधानसभा सीट वैसे तो पहले से ही खास रही है। लेकिन इस बार का मुकाबला कुछ अलग है। चुनाव आयोग ने पहले ही इस सीट को संवेदनशील घोषित कर दिया है। वही बीजेपी, कांग्रेस,सपा औऱ बसपा के घोषित प्रत्याशियों ने इस 2022 के चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है।

क्या कहता है-सामाजिक ताना-बाना-?

अमेठी जिले की गौरीगंज विधानसभा सीट में करीब तीन लाख मतदाता हैं.जिसमें 1.65 लाख के करीब पुरुष और लगभग 1.45 लाख महिला वोटर बताया जाता है।
जिले की इस विधानसभा सीट को राजपूत बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है.और विधानसभा सीट का चुनाव परिणाम निर्धारित करने में ब्राह्मण मतदाता भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति के साथ ही मुस्लिम मतदाता की भी अच्छी तादाद हैं।

इस सीट पर सबसे अधिक बार कांग्रेस फिर बीजेपी और बीते दो चुनाव से समाजवादी पार्टी का कब्जा है। एक बार बीएसपी ने भी अपना परचम लहराया है।

कौन जीतेगा गौरीगंज का चुनाव ?

गौरीगंज से कौन जीतेगा चुनाव यह अभी उलझी हुई पहेली है। सपा से राकेश प्रताप सिंह, बीजेपी से चन्द्र प्रकाश मिश्र,बसपा से रामलखन शुक्ला और कांग्रेस से फतेह बहादुर व आप से शिव प्रसाद कश्यप मैदान में है।
बात करें समाजवादी पार्टी की तो दो बार विधायक रहे राकेश प्रताप सिंह को माना जाता है कि इनकी पैठ हर गांव में है। खासकर ठाकुर, यादव,मुस्लिम और ब्राहम्ण। राकेश प्रताप सिंह 2017 में भी जीत कर आए थे जब बीजेपी की प्रचंड लहर थी। और प्रदेश बदलाव चाह रहा था।
ऐसे में स्थानीय पत्रकारों और बुद्धजीवियों की मानें तो राकेश को हराना सरल नहीं है।

वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के घोषित प्रत्याशी चन्द्र प्रकाश मटियारी जो कि 2007 से 2012 तक बीएसपी से विधायक रहें हैं। वो इस बार बीजेपी से चुनाव लड़ रहे हैं। इस बार बीजेपी ने इनपर भरोसा जताया है। और ये भी कहा जा रहा है कि ये ब्राह्मण वोट को एकजुट करने में सफल हो पाएंगे और बीजेपी की जीत दिलाएंगे।

वहीं मुसाफिरखाना के रहने वाले बसपा उम्मीदवार रामलखन शुक्ला भी इस बार निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। क्योंकि ये भी ब्राम्हण है। जितना वोट ये काटेंगे वो बीजेपी के लिये ज्यादा नुकसान दायक साबित हो सकता है। बजाय समाजवादी पार्टी के।

और यदि गौरीगंज के तमाम वरिष्ठजनों और पत्रकार आदि की मानें तो इस बार गौरीगंज विधानसभा में ब्राहम्ण और पुरानी पेंशन बाहाली के वोटर,अपनी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। माना जा रहा है जिधर ये वोट जाएगा वही प्रत्याशी चुनाव जीतेगा।

इस बार के चुनाव में बीजेपी और सपा के बीच कांटे टक्कर होनी तय मानी ज रही है। वही स्थनीये मतदाताओं की माने तो उनका कहना है कि पार्टियों के द्वारा घोषित प्रत्याशी जो भी मैदान में है उनमें या तो पार्टी अच्छी है प्रत्याशी सही नहीं है और या तो प्रत्याशी अच्छा है पार्टी सही नहीं है।

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