अमेठी:फिर से सताने लगा करोना का भय

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अमेठी से संजय यादव की रिपोर्ट

अमेठी: कोरोना का यह भयावह काल एवं 22 मार्च की तारीख शायद बच्चे से लेकर बड़ो तक सबको आजीवन याद रहेगी।

एकाएक देश के प्रधानमंत्री द्वारा जनता कर्फ्यू की घोषणा व लॉकडाऊन का ट्रायल। जी हां आज ही का दिन था जब देश के प्रधानमंत्री ने एकाएक देशवासियों से 21 मार्च को रविवार को जनता कर्फ्यू की अपील की थी। हालांकि इस अपील को सभी ने स्वीकार किया था एवं 22 मार्च रविवार के दिन सड़कों पर पूरी तरह सन्नाटा पसरा देखा गया था। ऐसा लग रहा था, मानो देवलोक से किसी ने कप! की अपील की हो और आमजन ने उस अपील को सहर्ष स्वीकार कर लिया हो, मगर जैसे ही देश के प्रधानमंत्री द्वारा रविवार को जनता कर्फ्यू की अपील की गई,तो बाजारों में रात 12 बजे तक राशन भरने की जो होड़ देखी गई थी,उसी से साफ हो चला था कि देश अब लॉकडाउन की ओर चला जायेगा और ठीक तीन दिन बाद जनता की आशंका सच निकली और 25 मार्च को देश में 21 दिन का लॉकडाउन लगा दिया गया।

लॉकडाउन की बातें तो अभी आने वाले दिनों में की जायेगी, आखिर इन 21 दिनों में परिवार के लोगों ने किस-किस तरह के नये अनुभव हासिल किये। किसी को गोल रोटी बनानी नहीं आई, तो कोई इन 21 दिनों में शराब, पुडिया और अपने-अपने इस्तेमाल की आवश्यक वस्तुओं के लिए किस-किस तरह से तड़पता और तरसता दिखाई दिया, मगर देश और दुनिया में कभी ऐसा भी दौर आयेगा कि लोगों को मुंह छिपाकर अपने घरों में कैद होकर ही रहना पड़ जायेगा। शायद ही इस भयावह दौर को कोई भी व्यक्ति अपने पूरे जीवनकाल में भूल पायेगा। अपनी मर्जी से उड़ान भरने वाले प्रत्येक व्यक्ति को इस तरह से कैद में रहना होगा, ऐसा कभी किसी ने सोचा तक नहीं होगा, मगर कोरोना नाम की इस बीमारी ने देश और दुनिया के प्रत्येक व्यक्ति को बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया था और आज एक वर्ष बाद भी यह बीमारी देश और दुनिया का पीछा छोड़ने को तैयार नहीं दिखाई पड़ रही है। आज भी कई देश कम्पलीट लॉकडाउन की सजा भोगते दिखाई पड़ रहे हैं। हालांकि भारतवर्ष के लोगो की पहले से ही बेहतर इम्यूनिटी पॉवर और सरकार की सूझबूझ के दम पर देश में कोरोना पर लगभग जीत तो हासिल कर ली, मगर कोरोना की दूसरी लहर से अभी भी चिंता की लकीरें सरकार और प्रत्येक व्यक्ति के माथे पर साफतौर पर दिखाई पड़ रही है। आने वाले समय में क्या होगा, यह तो समय के गर्भ में ही छिपा है, मगर फिलहाल आज जनता कयूं की याद लोगों के दिलों-दिमाग में ताजा होती दिखाई पड़ रही है और प्रत्येक व्यक्ति यही कहता दिखाई पड़ रहा है आखिर इस मनहूस काल से लोगों को कब छुटकारा मिलता दिखाई देगा।

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