कराह रही हैं अमेठी की बदहाल सड़कें !

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कहने को तो उत्तर प्रदेश का अमेठी जिला वीवीआईपी जिला कहा जाता है और लोगों द्वारा यह माना जाता है कि इस जिले को अन्य जिलों की अपेक्षा बेहतर सुविधाएं मिली होंगी इसके साथ साथ बहुत तरह के सारे विकास कार्य भी हुए होंगे इन कयासों के सच का आइना देखना हो तो आप अमेठी आइए।

आइए अब आपको दिखाते हैं रायबरेली और बाराबंकी के बॉर्डर पर पड़ने वाला मोहनगंज और बाजार शुक्ल क्षेत्र में हुई है विकास को विकास भी इस तरह से हुआ कि लोगों को दांतो तले उंगली दबाने पड़ गई लोगों का कहना है ऐसा विकास ना ही हुआ होता तो ही ज्यादा अच्छा रहता यहां सड़कों की हालत बेहद खस्ता है थोड़ी सी बारिश के बाद पता ही नहीं चलता है कि हम सड़क पर चल रहे हैं यह तालाब में चल रहे हैं यही हाल अस्पतालों का भी है जहां स्वास्थ्य सुविधाओं का पूरा पूरा अभाव है वार्ड बॉय से लेकर डॉक्टर तक अपनी मनमानी पर उतरे रहते हैं उन्हें ना शासन का भय है न ही स्थानीय आला अधिकारियों का।
बाजार शुक्ल क्षेत्र जगदीशपुर विधानसभा में आता है जहां से बीजेपी के विधायक सुरेश पासी उत्तर प्रदेश में राज्य मंत्री भी हैं और महीने में कम से कम 15 दिन क्षेत्र में उनका दौरा होता ही रहता है लेकिन उन्हें यह विकासशील और गड्ढा युक्त सड़कें नहीं दिखती हैं उन्हें क्यों नहीं दिखती है यह तो वही जाने लेकिन क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि मंत्री जी इन्हीं रास्तों से बंद गाड़ियों से हिचकोले खाते हुए निकलते हैं लेकिन उन्हें इन हिचकोले से कोई फर्क नहीं महसूस होता है।
अब आपको सीधे लिए चलते हैं जामो से भादर को जोड़ने वाली सड़क पर जहां कहां सड़क है कहां गड्ढा पता ही नहीं चलता लगभग तीस किलोमीटर यह सड़क इतनी खराब है कि लोग मजबूरी में चलते हैं साथ ही कंटीली झाड़ियां भी बहुत हैं
अब बात करते हैं जामो से वारिस गंज सड़क की इस सड़क पर आते दिन दुर्घटना हो रही है गड्ढे इतने बड़े है कि लगता है तालाब है

हालांकि सरकार के मुखिया ने गद्दी पर बैठते ही पहले ही दिन घोषणा कर दी थी कि प्रदेश की सड़कें गड्ढा मुक्त होंगी और गड्ढा मुक्त करने के लिए एक समय सीमा भी निर्धारित कर दिया था लेकिन मुखिया का आदेश सिर्फ हार्डिंग और कागजों तक ही सीमित रह गया धरातल पर आज तक नहीं उतर सका। इन तालाब जैसी शक्ल अख्तियार किए हुए सड़को पे आए दिन राजगीर चोटिल होते हैं छोटी गाड़ियां उन गड्ढों में फंस जाती हैं और कभी कभी तो सवारियों से भरी तीन पहिया वाले टेंपो वाहन उन्ही तालाब नुमा सड़कों पर पलट जाते हैं और सवारियां घायल हो जाती है हालांकि उससे और बड़े वाहन निकल तो जाते हैं लेकिन अगल बगल में बच बचाकर चल रही सवारियों और सड़क किनारे बने मकानों तक गंदे पानी और कीचड़ को पहुंचा देते हैं। यही है अमेठी के विकास का सच।

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