अमेठी: प्रशासनिक अमले की अनदेखी,गांव में हर तरफ गंदगी का अंबार

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बाजार शुकुल अमेठी: देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को नई दिल्ली के राजपथ से स्वच्छ भारत अभियान को शुरू किया था. इसे व्यापक रूप से देश भर में लागू भी करवाया गया. इस अभियान के लिए करोड़ों रूपए पानी की तरह बहाए गए. गांव-गांव शहर-शहर स्वच्छता की अलख जगाई गई। लेकिन इसके बावजूद कई गांवों की हालत बद से बदतर है। अधिकारियों ने गांव के विकास के नाम पर सिर्फ अपना विकास किया। दूसरी तरफ गांव के विकास करने को प्रतिबद्ध ब्लॉक स्तर पर बैठे ग्राम विकास अधिकारी, ग्रामीणों की समस्याओं के निदान की बात पर बजट नहीं बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।

गांव में हर तरफ है गंदगी का अंबार

बात कर रहे हैं विकासखंड से जुड़े ग्राम सभाओं की जहां स्वच्छ, सुंदर व स्वस्थ भारत के मंसूबे पर पानी फेरने में प्रशानिक अमला कोई कसर नहीं छोड़ रहा है. बानगी के तौर पर चाहे उरेरमऊ बूबू पुर ग्राम सभा का पूरे नेवाजी ग्राम हो चाहे अहमदपुर पालीजैसी दो ग्राम सभाओं से जुडे ग्राम पूरे लदई व नेवाज गढ़ आदि गाँवों में विकास तो दूर की बात है, विकास किसे कहते हैं यह बात भी लोगों को शायद नहीं पता. इन ग्रामों में न ही चलने के लिए अच्छी सड़कें हैं, न ही घरों का गंदा पानी बहने के लिए घर की नाली का बडी नाली से जोडने की व्यवस्था है विभिन्न तरह की बीमारियों से बचाव के लिए कभी भी कोई छिड़काव नहीं होता है. आलम ये है कि नालियां कूड़े कचरे से भरी पटी व ध्वस्त हो चुकी हैं। पानी का निकास न होने के कारण गन्दा पानी सड़कों पर ही बहता है. लोगों को आने-जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

क्या है ग्रामवासियों का आरोप

गांव में तरह-तरह की मुसीबतों का सामना करते हुए आवागमन करना पड़ता है. यहां पर साफ-सफाई न होने के कारण हर दिन कोई न कोई बीमार पड़ ही जाता है. सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं से पूर्णतया जानकारी से अलग रखा जा रहा है. इस बात को लेकर पूर्व में ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान से शिकायत भी की, इसके बावजूद कोई निष्कर्ष नहीं निकला. ग्रामीणों का कहना है। कि ग्राम प्रधान द्वारा आवास, शौचालय के साथ-साथ लगभग अन्य कई योजनाओं में घोटाला किया गया है. ग्राम सभा की बद से बत्तर हालात हैं, लेकिन प्रशासनिक अमला कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

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