हम देंगे चीन को “उम्मीद से ज्यादा”

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अतुल शर्मा

कभी कभी उम्मीद से ज्यादा मिल जाए तो हम समझ नहीं पाते कि उसे कैसे प्रदर्शित किया जाए । कुछ एैसे ही हुआ चीन के साथ। 15/16 जुन की रात जब चीनी सैनिकों को लगा कि भारत की छोटी सी टुकड़ी से तो वो आराम से निपट लेंगे और फिर चीन की पुरानी चाल की तरह गलवान घाटी को पुरी तरह कब्जा कर बैठ जायेंगे, पर यहां उन्हें उम्मीद से ज्यादा मिल गया। चीनियों ने कभी सोचा भी नही था कि भारतीय सेना की छोटी सी टुकड़ी, उनसे ही हथियार छीन कर जबरदस्त हमला कर देगी । यहां उन्हें उम्मीद से ज्यादा मिला और इतना ज्यादा मिला कि अब चीनी सरकार अपनी जनता को बता नहीं पा रही कि उनके कितने सैनिक शहीद हुए। भारत ने तो सम्मान के साथ अपने शहीदों को विदाई दी पर चीन अपने सैनिकों की कुर्बानी पर चुप है और यही चुप्पी वहां की जनता को परेशान कर रही है। चीन की सोशल मीडिया को देखे तो चीन की जनता में एक अजीब सी वेचैनी है। चीनी लोग जानना चाहते हैं कि उनके कितने सैनिक वीर गति को प्राप्त हुए। चीनी सरकार चाहे जो तर्क दे पर वो अपनी जनता को यह बता नहीं पा रही है कि भारत ने गलवान घाटी में उन्हें उम्मीद से ज्यादा नुकसान पहुंचा दिया है। चीन जब भी चोट खाता है शांत हो जाता है पर पलट कर वार जरूर करता है क्योंकि चीन और पाकिस्तान दोनों की युद्ध की रणनीति एक जैसी है, पलट कर दुबारा वार करने की। पर इस बार चीन 2020 के भारत से टकरा गया है।
चीन की रणनीति रही है चार कदम आगे और दो कदम पीछे, और इस तरह दो कदम पर कब्जा। चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी को कब्जा करने मे बहुत मजा आता है और अगर कम्यूनिस्ट पार्टी की चले तो वो पुरी दुनिया पर कब्जा कर ले, चाहे सैन्य बल से या घन बल से। पाकिस्तान पहले ही लगभग चीन के कब्जे में है । पाकिस्तान में आज खेती से लेकर टूरिज्म तक सब पर चीन का कब्जा है। पाकिस्तान पहले ही चीन अपनी बहुत सी जमीन दे चुका है और अगर चीन चाहे तो पाकिस्तान अपनी कोई भी जमीन चीन को देने से नहीं हिचकेगा। आने वाले 10 सालों में पाकिस्तान पर चीन का पुरी तरह से कब्जा होगा, सैनिक और आर्थिक दोनो। पाकिस्तान के कब्जा वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में बड़े पैमाने पर लोग पाकिस्तान के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इलाके के लोग पाकिस्तान के गलत नीतियों के चलते अपनी जमीन कब्जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। पाकिस्तान इन इलाकों में बड़े पैमाने पर जमीन कब्जा कर चीनी कंपनियों या चीनी सेना को दे रहा हैं। जमीन मुख्य रूप से पाकिस्तान द्वारा जबरन कब्जाई जा रही है और वो उसे चीन को दे रहा है। जमीन का इस्तेमाल चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा विकसित करने के लिए किया जाएगा। जो लोग अपनी जमीन देने से इंकार कर रहे हैं या तो उनकी हत्या कर दी जाती है या फिर बिना ट्रायल के उन्हें सजा सुना दी जाती है। चीन और पाकिस्तान का अगला कदम होगा कि वह इलाके में सेना की तैनाती करेंगे। आजादी के बाद हुए बंटवारे के बाद गिलगित-बाल्टिस्तान पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया था। इस इलाके में शिया कश्मीरी लोग बड़ी संख्या में थे जिनकी आबादी अब काफी कम हो गई है। वही दूसरी तरफ कच्छ सीमा पर हरामीनाला से करीब 10 किमी दूर स्थित 55 वर्ग किमी जमीन चीनी कंपनी को लीज पर दे दी। यह जगह अंतरराष्ट्रीय जलसीमा से भी 10 किमी की दूरी पर है। यह इलाका भारत के लिए सामरिक और सैन्य रूप से काफी अहम है। चीनी कंपनी ने यहां निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया है।
यही खेल चीन नेपाल में खेल रहा है । चीन नेपाल की जमीन हथियाने की फिराक में जुटा है। वह तिब्बत में सड़क निर्माण के नाम पर नेपाली भूमि पर अतिक्रमण कर रहा है। चीन सरकार तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में अपना रोड नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है। इससे कई नदियों और उपनदियों का रुख बदल गया है और वे नेपाल की तरफ बहने लगी चीन ने नदियों का रुख मोड़कर नेपाली जमीन पर कब्जा कर लिया है। हुमला जिले में चीन ने सड़क निर्माण के जरिये बागडारे खोला और करनाली नदी का रुख मोड़ दस हेक्टेयर जमीन कब्जिया ली है। वहीं, तिब्बत में निर्माण गतिविधियों के चलते सिनजेन, भुरजुक और जंबुआ खोला के रुख में हुए बदलाव से रसुवा की छह हेक्टेयर भूमि पर उसका कब्जा हो गया है। 1960 के दशक में हुए सर्वे के बाद नेपाल ने चीन के साथ सीमा निर्धारण के लिए सिर्फ सौ पिलर का निर्माण किया। वहीं, भारत से लगती सरहद की बात करें तो पिलर की संख्या 8553 के करीब है।
चीन को डर है आर्थिक मार की। अमेरिका के साथ चीन की चल रही ट्रेड वार से चीन संभल नहीं पा रहा है और यही कारन है कि चीन बेचैनी में लगातार गलती कर रहा है। ताइवान , हांगकांग, वियतनाम, जापान, भारत ….. चीन बहुत सारे फ्रंट एक साथ खोलकर दुनिया को दिखाना चाहता है कि वो दुनिया को अकेले कंट्रोल कर सकता है और चीन अपनी सेना को ग्लोबल सेना के रूप में स्थापित करना चाह रहा है। पर ये सारी कवायद चीन की बेचैनी दिखाता है और वो बेचैनी है आर्थिक क्षेत्र में चीन को लगातार मिल रही हार। दुनिया बहुत दिनो से चीन को संदेह की नजर से देख रही थी और करोना प्रकरण ने संदेह को विश्वास में बदल दिया। चीन ने दुनिया से अपना भरोसा खो दिया है। ज्यादातर देश अपने व्यापार को चीन से बाहर ले जाने की तैयारी कर रहे है । बस यही समय है चीन पर चोट करने की। हमे दुबारा चीन के साथ अपने व्यापार पर सोचना होगा। तैयारी करनी होगी, पर हम कर सकते है। अगर हमने आने वाले कुछ महीनों या साल भर में चीन के साथ अपने व्यापार को आधा भी कर दिया तो मान लिजिए चीन को टूटने से कोई नही रोक सकता है। अगर हमने शुरूआत किया तो पुरी दुनिया हमारे साथ होगी। सही समय है चोट करने का चीन पर । सेना ने दे दिया अब हमारी और सरकार की बारी है चीन को आर्थिक क्षेत्र में उम्मीद से ज्यादा चोट देने की। चीन की उम्मीद से ज्यादा।

( लेखक रक्षा और विदेश मामलों के जानकार है )

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