निजी शिक्षण संस्थान के संचालकों की मनमानी पर अंकुश लगाए सरकार-अनिल सिंह

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अमेठी: 19 मई 2020 देश कोरोना महामारी संकट की मार को झेल रहा है लेकिन विद्यालय का प्रबंध तंत्र डाकू से भी बदतर बर्ताव पर उतारू है, अप्रैल मई-जून की फीस नहीं लेनी चाहिए इसके बावजूद स्कूलों से अभिभावकों पर फीस के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया गया है।

जिला कांग्रेस के प्रवक्ता अनिल सिंह ने आज जारी एक वयान मे कहा है कि अमेठी- रायबरेली के लाखों अभिभावकों का रोजगार छिन गया है कई हजार अभिभावक अपने बच्चों को न पढ़ा पाने को मजबूर हैं।
इसलिए तीन माह की फीस माफ करने हेतु मदद की मांग उठाई है और यह भी मांग कर रहे हैं कि राज्य सरकार अपनी नीति स्पष्ट करें और इस वर्ष कोई भी स्कूल फीस न बढ़ाए।
अनिल सिंह ने कहा कि विद्यालय फरवरी-मार्च में ही 10% फीस बढ़ा चुके हैं लोगो की राहत के लिए ट्यूशन फीस छोड़कर अन्य फीस न ली जाए अधिकांश स्कूल(एक्टिविटी,एडमिशन) फीस वसूलते हैं स्कूल बंद है फिर भी ट्रांसपोर्ट जमा करने का दबाव बना रहे हैं

कांगेस के प्रवक्ता ने कहा कि कोरोना के कारण बेरोजगार हुए लोगों का काम बंद है नौकरियों पर विकराल संकट है,
अमेठी जनपद की सीमा के कुछ दूर पर स्थापित रायन इंटर नेशनल स्कूल रायबरेली,एस जे एस,सेंटपिटर्स व एल पी एस से बात करने पर स्कूल द्वारा बताया जाता है कि विद्यालय को प्रदेश व देश की सरकार से किसी प्रकार का संरक्षण व मदद नही मिलती ऐसे में हम आम लोगों की कोई सहायता नही करते – अर्थात (शिक्षा का अधिकार के तहत भी कोई कानून नहीं लागू होता है

अनिल सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से मांग की है कि इस मामले पर कड़ा निर्णय लेते हुए अभिभावकों को राहत एवं भारत के भविष्य कल के भावी नागरिक अपनी शिक्षा को ग्रहण कर सकें तथा एकता अखंडता एवं भारत की प्रगति में अग्रणी भूमिका में सदैव की भांति निरन्तर बने रहें।

बताते चले कि इस खबर के चलने से पहले ही कुछ विद्यालय प्रबन्धको के चमचो का मानसिक संतुलन बिगडता दिखायी दे रहा है उंहे इस बात का खतरा दिख रहा है कि इस खबर के चलने से कही उनकी चमचागीरी कमजोर न पड जाय ..वैसे पत्रकारिता को चोला शरीर पर डाले ऐसे चमचे अपनी पीछे की कहानी को न देख अपने को शिक्षा जगत का पांर्डक समझ बैठे है।

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