गुमनाम समाजसेवी राशन और आवश्यक वस्तुएं देकर कर रहे जरूरतमंदों की मदद

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शिवगढ़(रायबरेली) कोरोना महामारी को रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश में किए गए 21 दिनों के लॉकडाउन के बाद से सबसे ज्यादा दिहाड़ी मजदूर प्रभावित हुए हैं। कुछ तो ऐसे दिहाड़ी मजदूर एवं ठेले खोमचे वाले हैं जिनकी हालत रोज कुआं खोदने और रोज पानी पीने वाली जैसी थी,जिनको दो-दो दिन उपवास तक करना पड़ा। क्षेत्र के कई ऐसे भी है जिन्होंने दिल्ली से शिवगढ़ क्षेत्र तक का सफर पैदल तय किया है।
21 दिनों के लॉकडाउन के बाद घर से न निकल पाने के कारण कई परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। कोई भूखा ना रहे जिसके लिए शासन प्रशासन पूरी तरह सजग है। रायबरेली की तेजतर्रार जिलाधिकारी सुभ्रा सक्सेना और पुलिस अधीक्षक स्वप्निल ममगैन के निर्देश पर ऐसे लोगों को चिन्हित करके जरूरतमंदों को भोजन और राशन पहुंचाने का सराहनीय कार्य किया जा रहा है। देवदूत बनी रायबरेली पुलिस अपनी जान की परवाह किए बगैर दिन रात सुरक्षा में लगी रहने के साथ ही जरूरतमंदों को राशन और दवाएं पहुंचाने का सराहनीय कार्य कर रही है। वहीं लॉकडाउन प्रभावितों की मदद के लिए समाज से दो तरह के लोगों ने आगे हाथ बढ़ाएं जिनमें से कुछ तो ऐसे भी हैं जो कई दिनों से भूखे प्यासे लोगों को पन्नी में चार पूड़िया पकड़ाकर फोटो खिंचा-खिंचा कर सोशल मीडिया पर डालकर झूठी समाज सेवा का डंका पीट रहे हैं। वहीं एक ऐसा भी गुमनाम समाजसेवी वर्ग है जो इस राष्ट्रीय संकट में जरूरतमंदों की भोजन, राशन और आर्थिक रूप से मदद कर रहा है। किंतु समाज का यह ऐसा वर्ग है जिसने इस विपदा की घड़ी में ना तो किसी को राशन भोजन और आर्थिक मदद देते वक्त फोटो खिंचाई और ना ही झूठी वाहवाही के लिए सोशल मीडिया पर फोटो डालकर डंका पीटा। इस राष्ट्रीय संकट में आज ऐसे ही वर्ग की जरूरत है। इसी गुमनाम समाजसेवी की श्रेणी में शिवगढ़ क्षेत्र में सपा के बछरावां विधानसभा अध्यक्ष राकेश त्रिवेदी उर्फ आलू महराज का भी नाम आता है। जिन्होंने लॉकडाउन के पहले दिन से ही जरूरतमंदों को राशन और आवश्यक वस्तुओं को बांटना शुरू कर दिया। यही नहीं राकेश त्रिवेदी और उनके पुत्र मनोज कुमार त्रिवेदी ने फेसबुक और व्हाट्सएप पर लॉकडाउन के पहले दिन ही फोन नंबर सहित एक पोस्ट की, कि क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति भूखा ना सोए जिसके पास राशन ना हो वह दिए गए फोन नम्बरों पर बात करके कई दिनों का राशन ले सकता है। जिसके पश्चात 50 से अधिक लोगों ने राकेश त्रिवेदी उर्फ आलू महराज से संपर्क करके अपनी समस्या बताई। जिनके द्वारा आटा चावल से लेकर चीनी साबुन तक जरूरतमंदों को नि:शुल्क उपलब्ध कराया गया। किंतु किसी भी गरीब मजबूर की लाचारी का फायदा नहीं उठाया ना ही फोटो खिंचाई और ना ही सोशल मीडिया पर पोस्ट करके समाजसेवी होने का डंका पीटा। यही नहीं राकेश त्रिवेदी उर्फ आलू महराज समूची विधानसभा में लोगों से संपर्क करके जरूरतमंदों की हर संभव मदद करने में जुटे हुए हैं। इस बाबत जब राकेश त्रिवेदी से बात की गई तो उनका यही कहना था कि आज जिनको लोग एक लंच का पैकेट पकड़ा कर 10 लोग फोटो खिचाते हैं वे मेहनती लोग हैं, जिनकी मजबूरी का फायदा उठाना अत्यंत निंदनीय है।

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