स्मृति ने बढ़ाया अमेठी का सम्मान

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अमेठी: स्मृति इन दिनों अमेठी जिले में लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। क्योंकि इस स्मृति ने इसी सप्ताह घोषित झारखंड PCS (J) की परीक्षा प्रथम प्रयास में ही पास करते हुए जज बनकर क्षेत्र एवं जिले का मान बढ़ाया है। जिसको लेकर समाज के हर तबके ने गर्व से अमेठी की इस बेटी का अभिनंदन करते हुए नई युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बताया है।

आपको बता दें कि अमेठी जनपद एवं तहसील क्षेत्र के संग्रामपुर ब्लॉक अंतर्गत मूलतः ठेंगहा (शुकुलपुर) के रहने वाले घनश्याम प्रसाद त्रिपाठी की पोती स्मृति त्रिपाठी ने अभी हाल में ही घोषित झारखंड पीसीएस जे के परीक्षा परिणाम जिसमें 107 बच्चे उत्तीर्ण हुए । इसी परीक्षा में स्मृति त्रिपाठी ने 24 वां स्थान प्राप्त कर अमेठी का नाम रोशन किया है | इंटरमीडिएट के बाद क्लैट की परीक्षा के माध्यम से स्मृति ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी रांची से 5 वर्षीय बी.ए. एल.एल.बी इंटीग्रेटेड कोर्स कम्प्लीट किया।

जिसके पश्चात वह जज बनने की तैयारी में लग गयीं और साल 2018 में झारखण्ड सिविल जज का फॉर्म भर दिया जिसका अंतिम परिणाम इसी सप्ताह घोषित हुआ जिसमें स्मृति का चयन हो गया। सफलता के बाद स्मृति के परिवारीजनों को लगातार बधाइयाँ एवँ शुभकामनाएं प्राप्त हो रही हैं। इसी क्रम में आज जनपद के कुछ सम्भ्रांत लोंगो ने स्मृति के 75 वर्षीय दादा जी घनश्याम प्रसाद त्रिपाठी को फूल मालाओं से स्वागत करते हुए शुभकामना एवं बधाइयाँ प्रेषित किया । वहीं पर पोती की वजह से सम्मानित हो रहे बुजुर्ग श्री त्रिपाठी की खुशियों का ठिकाना ही नहीं रहा। उन्होंने स्मृति को आशीष प्रदान करते हुए कहा कि हम लोग बेहद खुश हैं ईश्वर निरंतर प्रगति का मार्ग प्रशस्त करे जिससे जिले के गौरव में उत्तरोत्तर वृद्धि होती रहे।

अपनी इस सफलता पर हर्ष एवं उल्लास से भरी स्मृति ने अपनी सफलता का पूर्ण श्रेय अपनी माता एवं पिता को दिया । वे अपने पिता को अपना रोल मॉडल मानती हैं और उन्हीं के पद चिन्हों पर चलने का संकल्प रखती हैं। बचपन से ही स्मृति CRPF में कार्यरत अपने पिता की निःस्वार्थ देशसेवा एवं कर्मनिष्ठा से प्रभावित रही हैं । जिससे उनके अंदर भी समाज के हर वर्ग को न्याय दिलाने एवं समाज के लिए कुछ करने का भाव जगा। वह बताती हैं कि जज बनने की जो चाहे वह मेरे अंदर मेरे पैरंट्स ने डाला है। वह हमेशा से कहते आए हैं कि अपने लिए तो हर कोई काम करता है कोई ऐसा प्रोफेशन होना चाहिए जहां पर दूसरों के लिए काम कर सके इस उम्मीद से मुझे जुडिशली बहुत ही अच्छा लगता विशेषकर लोअर कोर्ट में हर तबके का इंसान न्याय मांगने आता है। अगर मैं ऐसे किसी इंसान की मदद कर सकूं जो नया मांगने आया है उसको न्याय दे सकूं तो इससे बेहतर और कोई कार्य नहीं हो सकता है यही सीख है जो मेरे पैरंट्स ने हमेशा से मुझे दी है। प्री से लेकर इंटरव्यू तक जो पूरा फेज था । इसमें मेरे पैरंट्स पूरा मेरे साथ लगे हुए थे । मुझे हमेशा से पूरा सपोर्ट दिया है । इस पूरे प्रोसेस में उनको मुझे मोटिवेट रखने में मेरे माता पिता का बहुत ही बड़ा योगदान है। पढ़ाई के टाइम में जहां तक घंटे की बात होती है तो मैंने कभी घंटे देखे ही नहीं है। हां पर यह गोल जरूर रहता था कि जो कंसेप्ट है। आज इस कॉन्सेप्ट को पूरा खत्म कर देना है। उदाहरण के लिए प्री और मेंस में मैं कैलेंडर में डिवाइड कर लेती थी । उदाहरण के लिए सीआरपीसी हो गया तो उसको मुझे 3 दिनों में खत्म करना है। जिसमें पढ़ते हुए सब कुछ रिवाइज मुझे करना है। मेरा मेन टारगेट यही रहता था। कितने घंटे की पढ़ाई करनी है यह मेरा कभी टारगेट नहीं रहा । मैं प्री में और मेंस में सब्जेक्ट की डेडलाइन बनाकर उस पर काम किया करती थी । हमेशा से मेरा टारगेट रहा करता था कि रीडिंग के बाद मैं दोबारा से सबको रिवाइज कर लूं । परीक्षा की डेट आने तक मैं रिवीजन करती रहती थी। पहले की अपेक्षा हमारे समाज में बहुत ही सकारात्मक डेवलपमेंट आया है । आजकल लड़कियों को भी उतने ही मौके मिल रहे जितने लड़कों को मिल रहे हैं और यह जितना ही ज्यादा होगा उतना ही अच्छा सोसाइटी के लिए होगा । मैं अपने आप को बहुत ही लकी मानती हूं जो कि मैं एक ऐसी फैमिली में पली-बढ़ी हूं । मेरे पेरेंट्स ने मुझ में और मेरे भाई में कोई अंतर नहीं समझते हैं । कभी भी किसी भी तरह का कोई भेदभाव हम दोनों के बीच नहीं किया । उन्होंने हम दोनों को सक्षम बनाने के लिए बराबर अपॉर्चुनिटी हमेशा दिए हैं । मैं सभी लड़कियों को यह कहना चाहूंगी कि उन्हें अपने सपनों के लिए पूरी तरह मेहनत करनी चाहिए और खुद पर विश्वास रखना चाहिए तथा अपने सपनों को साकार करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देनी चाहिए।

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