सुल्तानपुर:राम हमारे पूर्वज थे,हैं और रहेंगे:देवकीनंदन महाराज

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सुल्तानपुर से वाजिद हुसैन की रिपोर्ट

सुल्तानपुर लम्भुआ: विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वाधान में 18 से 24 अक्टूबर 2019 तक प्रतिदिन गोमती नदी के निकट, खुनशेखपुर, सुल्तानपुर में पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के मुखारबिंद से श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के प्रथम दिवस पर हजारों की संख्या में भक्तों ने महाराज जी के श्रीमुख से कथा का श्रवण किया।
श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस पर पूज्य महाराज श्री ने भागवत महात्म्य का सुंदर वर्णन श्रोताओं को श्रवण कराया।

भागवत कथा के प्रथम दिवस की शुरुआत दीप प्रज्वलन, भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ की गई ।

देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने भागवत प्रसंग की शुरूआत भागवत के प्रथम श्लोक से की
सच्चिदानन्द रूपाय विश्वोत्पत्यादि हेतवे तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयम नुमः
वासुदेव सुतं देवम् कंस चानुर मर्दनम् देवकी परमानंदम् कृष्णम् वंदे जगदगुरुम्।।


महाराज श्री ने कहा कि भागवत के प्रथम श्लोक में भगवान को प्रणाम किया गया है, उनके स्वभाव का वर्णन किया गया है, उनकी लीलाओं का वर्णन किया गया है। भागवत को समझना भगवान को समझने के बराबर है।
पूज्य महाराज श्री ने कथा में बताया की अगर हमारे बच्चों को शिक्षा ना दी जाए तो यह संसार कैसा होगा ? जो अनपढ़ लोग होते हैं जिन्हे अक्षर का ज्ञान नहीं होता है जब वो किसी बोध वाले व्यक्ति के पास जाते है तो उन्होंने शर्म महसूस होती है की यह सबकुछ जानता है, हम कुछ नहीं जानते, यह अच्छा बोलता है हम अच्छा बोल नहीं सकते क्योंकि वो साक्षर है और हम निराक्षर हैं। उस अक्षर का कितना महत्व है जो शुरू में हमे अ सिखाती है। अगर बच्चों को जबरदस्ती स्कूल भेजो तो वह मना कर देते हैं, शुरुआत में बच्चे स्कूल जाना पसंद नहीं करते। वैसे ही भागवत रूप यह कथा पंडाल ज्ञान का एक स्कूल है, आपका प्राइमरी स्कूल सिखाता है पैसा कैसे कमाएं लेकिन भागवत का यह कथा पंडाल आपको सिखाता है जीवन कैसे जीना चाहिए ? आप स्कूली और कथा पंडाल दोनों की शिक्षाओं से असहमत नहीं हो सकते।
महाराज श्री ने राम मंदिर पर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि कुछ लोगों को लगता है राम मंदिर से हमारा लेना देना क्या है ? कुछ भारतीय जो तथाकथित रूप से अपने आपको सेक्यूलर समझते हैं वो कहते हैं राम से हमारा मतलब क्या है, राम मंदिर बना तो ठीक, नहीं बना तो ठीक। इस समाज में देश में कुछ भी घटना घट रही हो आप उससे पलला नहीं झाड सकते, वरना एक दिन वो आएगा ये समस्या आपके घर तक पहुंच जाएगी और आपको बचाने वाला फिर कोई नहीं होगा। आपके देश में अगर वो समस्या है तो वो आपकी समस्या है।
महाराज श्री ने कहा कि राम हमारी अस्मिता है, राम हमारी आस्था है आप अपना घर बदल सकते हैं, काम बदल सकते हैं लेकिन जन्म स्थान नहीं बदल सकते, अपने पूर्वज आप नहीं बदल सकते और राम हमारे पूर्वज थे, राम हमारे पूर्वज हैं और राम हमारे पूर्वज रहेंगे, उनकी समस्या हम सब की समस्या है। हम सबको यह प्रार्थना करनी चाहिए अब बहुत हो चुका अब राम का वनवास नहीं होगा, अब राम मंदिर का निर्माण होगा।
पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने कथा का वृतांत सुनाते हुए कहा की एक बात सनकादिक ऋषि और सूद जी महाराज विराजमान थे तो उन्होंने ये प्रश्न किया की कलियुग के लोगो का कल्याण कैसे होगा ? आप देखिये किसी भी पुराण में किसी और युग के लोगो की चिंता नहीं की पर कलयुग के लोगो के कल्याण की चिंता हर पुराण और वेद में की गई कारण क्या है क्योकि कलयुग का प्राणी अपने कल्याण के मार्ग को भूल कर केवल अपने मन की ही करता है जो उसके मन को भाये वह बस वही कार्य करता है। और फिर कलियुग के मानव की आयु कम है और शास्त्र ज्यादा है तो फिर एक कल्याण का मार्ग बताया भागवत कथा। श्रीमद भागवत कथा सुनने मात्र से ही जीव का कल्याण हो जाता है महाराज श्री ने कहा कि व्यास जी ने जब इस भगवत प्राप्ति का ग्रंथ लिखा, तब भागवत नाम दिया गया। बाद में इसे श्रीमद् भागवत नाम दिया गया। इस श्रीमद् शब्द के पीछे एक बड़ा मर्म छुपा हुआ है श्री यानी जब धन का अहंकार हो जाए तो भागवत सुन लो, अहंकार दूर हो जाएगा।
व्यक्ति इस संसार से केवल अपना कर्म लेकर जाता है। इसलिए अच्छे कर्म करो। भाग्य, भक्ति, वैराग्य और मुक्ति पाने के लिए भगवत की कथा सुनो। केवल सुनो ही नहीं बल्कि भागवत की मानों भी। सच्चा हिन्दू वही है जो कृष्ण की सुने और उसको माने , गीता की सुनो और उसकी मानों भी , माँ – बाप, गुरु की सुनो तो उनकी मानो भी तो आपके कर्म श्रेष्ठ होंगे और जब कर्म श्रेष्ठ होंगे तो आप को संसार की कोई भी वस्तु कभी दुखी नहीं कर पायेगी। और जब आप को संसार की किसी बात का फर्क पड़ना बंद हो जायेगा तो निश्चित ही आप वैराग्य की और अग्रसर हो जायेगे और तब ईश्वर को पाना सरल हो जायेगा ।
कथा पंडाल में श्रीमद् भागवत कथा के यजमानों सहित कई गणमान्य अतिथियों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिती दर्ज करवाई ।

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