शिवगढ़-किसानों ने सिंचाई विभाग के खिलाफ खोला मोर्चा

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प्रदर्शन करते हुए दी आंदोलन की चेतावनी

शिवगढ़ (रायबरेली) एक तरफ प्रदेश सरकार किसानों की आय दोगुना करने के लिए कटिबद्ध है तो वहीं दूसरी ओर सिंचाई विभाग के आला अधिकारी प्रदेश सरकार की मंशा पर पानी फेरनी से बाज नहीं आ रहे। आलम यह है कि सिंचाई विभाग की लापरवाही के चलते बैंती रजबहा में हेड से टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। किसानों ने खून पसीना बहाकर एवं किसान क्रेडिट कार्ड, रसूखदारों,लंबरदारों से कर्ज लेकर किसी तरह जो धान की नर्सरी डाली थी वह सूख कर चौपट होने की कगार पर है। जिसको लेकर आक्रोशित कृषकों का गुस्सा फूट पड़ा कृषकों ने सिंचाई विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन कर रहे हैं किसानों का आरोप है कि सिंचाई विभाग खण्ड 28 द्वारा बैंती राजबहा की सफाई के नाम पर हर साल खेल किया जाता है। कागजों पर ही बैंती रजबहा की सफाई करके लाखों रुपए डकार लिए जाते हैं। गौरतलब हो कि जहां एक ओर सिंचित क्षेत्रों में धान की रोपाई चरम सीमा पर है वहीं दूसरी ओर शारदा सहायक खण्ड 28 से संबद्ध बैंती रजबहा सिल्ट से पटी हुई है। जिसके चलते पूरे पान कुंवर खेड़ा ,दौलत खेड़ा,करौंजा कुम्भी तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। बैंती रजबहा में पानी ना आने के चलते खेतों में धूल उड़ रही है। जिसको लेकर सोमवार को किसानों की सब्र का बांध टूट गया और कृषक बच्चू लाल पांडेय, शिवगढ़ भाजपा महिला मोर्चा की मंडल अध्यक्ष किरण तिवारी, दुर्गा प्रसाद, संदीप पाठक, राम लखन पांडेय, जगदंबा सिंह राजू पांडेय सहित दर्जनों कृषकों ने सिंचाई विभाग और सिंचाई समिति के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जमकर प्रदर्शन किया और आंदोलन की चेतावनी देते हुए कहा कि यदि चार दिनों के अंदर बैंती रजबहा के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचा तो आंदोलनत्मक रणनीति अपनाकर सिंचाई विभाग के खिलाफ सड़कों पर उतरा जाएगा। वहीं मोर्चा की शिवगढ़ मंडल अध्यक्ष किरण तिवारी ने कहा कि नहरों की सफाई के नाम पर आपस में बंदरबांट का जो खेल चल रहा है उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को बेनकाब करने का काम किया जाएगा।

क्या कहते हैं जिम्मेदार

पिछले दिनों रामनगर में दो सगी बहनों की नहर में डूबने से पानी कम करा दिया गया था जिसके चलते हेड से टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। जैसे ही पानी पूरी मात्रा में छोड़ा जाएगा पानी की किल्लत समाप्त हो जाएगी। साथ ही पहले नहरों की सफाई रवी और खरीफ दोनों फसलों में होती थी किंतु अब नए शासनादेश के अनुसार नहरों की सफाई साल में सिर्फ रवी की फसल में होती है।शिकायत मिली है यदि कहीं सिल्ट जमी है तो उसे सफा कराने का कार्य किया जाएगा। ताकि किसानों को पर्याप्त मात्रा में सिंचाई के लिए पानी मिल सके।

(जेई शैलेंद्र कुमार तिवारी)

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