भीख मांगकर गुजर करने पर मजबूर है बचपन

0
471

बछरावां रायबरेली केंद्र व प्रदेश की सरकारें चाहे जितना स्कूल चलो अभियान की सफलता का ढिंढोरा पीट रही हो । ग्रामीण क्षेत्रों में वह बचपन जो खेलने में खाने तथा शिक्षा प्राप्त करने की उम्र के दौर से गुजर रहा है । वह बगल में झोला लटका कर वह हाथ में एक छड़ी लेकर दरवाजे दरवाजे पहुंचकर भीख मांगने के लिए मजबूर हो रहा है । ऐसा ही एक नजारा शिवगढ़ विकासखंड के अंतर्गत ग्राम तिवारीपुर में देखने को मिला जहां एक लगभग 9 वर्षीय बच्चा हाथ में छोटा सा डंडा लिए तथा पीठ पर एक थैला लटकाए दरवाजे दरवाजे भीख मांगता हुआ दिखाई दिया । पूछताछ के दौरान उसका दर्द उस समय छलक पड़ा जब उससे उसका नाम पूछा गया उस मासूम ने कहा कि मां बाप ने तो कुछ और नाम रखा था परंतु अब दुनिया उसे छोटू मंगता के नाम से पुकारती है उसने बताया कि वह कसना ग्राम सभा का रहने वाला है उसका एक भाई भी है जो उससे 2 वर्ष बड़ा है वह भी भीख मांगता है दोनों भाई मिलकर परिवार चलाने का प्रयत्न करते हैं क्योंकि उसके पिता अक्सर बीमार रहते हैं जब से यह पूछा गया कि क्या उसका मन स्कूल जाने के लिए नहीं करता तो उसका जवाब था कि अच्छी जिंदगी कौन नहीं जीना चाहता लेकिन पेट की आग सब कुछ करने पर मजबूर मजबूर कर देती है सारी वार्ता के दौरान छोटू के जवाबों से ऐसा लग रहा था जैसे वह बच्चा न होकर हालात से मजबूर एक परिपक्व इंसान है उसके उत्तरों ने इस संवाददाता को यह सोचने के लिए मजबूर कर दिया कि विकासशील देशों की गिनती में आने वाले देश 21 वी सदी मे क्या इस तरह ही दिखाई देंगे।

रिपोर्ट अमित मिश्रा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.