स्मृति ईरानी के काम के 2 साल,अपने ही गढ़ में कांग्रेस सिर्फ स्मृतियों में ? दो साल पूरा होने पर एक विश्लेषण

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अमेठी:


जिले की सांसद केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को अपने कार्यकाल का 2 वर्ष पूरा हो गया है जहां भाजपाई सब बधाइयां देने में लगे हैं और तरह-तरह की योजनाओं को स्मृति से जोड़कर उनकी उपलब्धियों को बता रहे हैं वहीं दूसरी ओर कांग्रेसी नेता लापता सांसद के रूप में प्रदर्शित कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं सबसे हाई प्रोफाइल सीट अमेठी कि. जहां गांधी परिवार से कई प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं 2019 लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी को अमेठी की जनता ने 55 हजार से अधिक मतों से विजय दिलाई। उसके तुरंत बाद स्मृति के ट्विटर हैंडल से ट्वीट हुआ कि कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं होता, उसके बाद लगातार विकास की रफ्तार को तेज करने के लिए आए दिन कार्यक्रमों का आयोजन होता रहा और इसी बहाने प्रदेश व देश के मन्त्रियो का जमावड़ा लगा रहता और अमेठी में सौगातों की वर्षा होने लगी. एक कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने कहा कि दीदी ने कहा की भाई अमेठी में 726 सड़कें ठीक नहीं है हमारे परिवार के लोगों को परेशानी होती है,मैने कहा दीदी जल्द सभी सड़कों पर काम शुरू हो जाएगा


स्मृति ईरानी ने आपकी दीदी आपके द्वार कार्यक्रम की की शुरुआत


स्मृति इतने से नहीं रुकीं और आपकी दीदी आपके द्वार कार्यक्रम का शुरुआत करके सीधे जमीनी स्तर पर पंचायत के माध्यम से लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं को सुनकर तुरंत निस्तारित करने का निर्देश करने लगी जहां तक देखा जाए तो जहां भी सांसद का कार्यक्रम लगता यह कहीं गाड़ी रुक जाती तो लोगों की समस्याओं को सुनकर उसका निस्तारित करने का अधिकारियों को निर्देश देती कुछ मामले ऐसे भी हुए जो लोगों के में दिलों में आज भी बसे हुए हैं जैसे कि एक व्यक्ति की विदेश में मृत्यु हो गई और परिवार वाले लाने में असमर्थ थे वह स्मृति से मिले और अपने पीड़ा बताई स्मृति ने परिवार को साथ खड़े रहने का वायदा किया और सारी प्रक्रिया पूरी करके शव घर तक पहुंचाया. कुछ समय पश्चात प्रकृति की मार पूरे विश्व पर कोरोनावायरस महामारी के रुप में आई और पूरा विश्व परेशान हो गया तब भी अमेठी सांसद अपने लोगों के लिए सदैव खड़ी दिखी आपकी दीदी आपके द्वार कार्यक्रम अब डिजिटल हो गया और वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम निरंतर जारी है।
स्मृति के प्रयास से जनपद को एक चिकित्सा विश्वविद्यालय की भी सौगात मिली इस महामारी में जब पूरा भारत ऑक्सीजन के लिए परेशान है तो वही अपनों से कहकर तालमेल से 6 ऑक्सीजन प्लांट ही लगवा रही है कोरोना के संक्रमण को देखते हुए ग्राम निगरानी समिति की टीम बनाई गई और जनपद में 1286 टीमें कार्यरत है लगातार अपने-अपने क्षेत्रों में दवा,लक्षण युक्त व्यक्तियों की सूचना और सावधानी टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिदिन डोर टू डोर सर्वे कर रही है इस कोरोना महामारी में स्मृति ने जिला प्रशासन के सहयोग से ग्रामीण स्तर पर गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराए जाने के लिए पूरे जिले का खाका तैयार किया और उनको पौष्टिक आहार उपलब्ध भी कराया जिसकी संख्या पिछले वर्ष लगभग 7हजार थी और इस लॉकडाउन में इसकी संख्या 44000 से अधिक है इतना अधिक गहरे स्तर पर जमीन पर कार्य करते शायद ही कभी सुना होगा की स्मृति अपने परिवार की तरह अमेठी की महिलाओं की दीदी ऐसे ही नहीं कही जाती प्रथम चरण में कोरोनावायरस से बचाव के लिए स्मृति ने अपनी निधि से 1करोड़ रुपए तत्काल स्वीकृत किया था जिससे पूरे जिले में कोरोना से लड़ने के लिए कोरोना योद्धाओं को काफी मदद मिली थी इसके अलावा बहुप्रतीक्षित अमेठी बाईपास गौरीगंज असैदापुरजिला अस्पताल गौरीगंज फायर स्टेशन ऑफिस के साथ ही जिला प्रशासन की मदद से गिनीज बुक में वृक्षारोपण दर्ज करने का भी श्रेय स्मृति को मिला इतना ही नहीं आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाली को दूर करने के लिए वेदांता समूह के सहयोगी संस्था हुमाना पीपुल टू पीपल संस्था से तालमेल करके नंद घर के रूप में परिवर्तन करना भी प्रमुख रूप से है ऑपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय का जीर्णोद्धार स्मृति का श्रेय अमेठी सांसद स्मृति ईरानी को दिया गया.


देखा जाए तो आसपास के जिलों में ही नहीं प्रदेश के सबसे बेहतरीन सांसदों में से एक हैं यह हम नहीं कह रहे हमारी टीम ने 10 हजार से अधिक व्यक्तियों से सर्वे करके उनकी राय के आधार पर यह लेख लिखा गया है अमेठी लाइव की टीम जनपद के हर क्षेत्रों में 2 साल के कार्यकाल का अमेठी का हाल जानने के लिए निकली तो लोगों ने कहा यदि प्रशासन सहयोग करे तो दीदी से अच्छा कोई नहीं।

स्मृति ईरानी के काम से और राहुल गांधी के जिले में न आने से अब गांधी परिवार की थोड़ी छवि धूमिल हो रही है। स्मृति की चमक के आगे गांधी के गढ़ को अब लोग भूलते जा रहे हैं। अगर कांग्रेस इसपर विचार नहीं करती तो वो जिले में स्मृतियों के रूप में धूंधली यादें छोड़ जाएगी।

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